भिलाई तिहरा हत्याकांड: डीएसपी सुरेश ध्रुव की ‘सुपर इन्वेस्टिगेशन’ से मिला न्याय, कातिल को फांसी के फंदे तक पहुँचाने में रही अहम भूमिका

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भिलाई।तालपुरी के बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड में आरोपी रवि शर्मा को मिली मृत्युदंड की सजा केवल एक न्यायिक फैसला नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ पुलिस की सटीक और वैज्ञानिक विवेचना की जीत है। इस पूरे मामले को सुलझाने और साक्ष्यों की ऐसी अभेद्य कड़ी तैयार करने में तत्कालीन थाना प्रभारी और वर्तमान डीएसपी (EOW/ACB) सुरेश कुमार ध्रुव की पेशेवर कार्यप्रणाली ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
​गुमराह करने वाली साजिश को किया बेनकाब
​साल 2020 में जब यह जघन्य कांड हुआ, तब आरोपी रवि शर्मा ने पुलिस को भटकाने के लिए पूरी फिल्म पटकथा की तरह साजिश रची थी। मौके पर ‘संजय देवांगन’ के नाम का झूठा संदेश लिखना और खुद को मृत साबित करने के लिए एक अज्ञात व्यक्ति की हत्या करना—ये ऐसी चुनौतियां थीं जो किसी भी जांच अधिकारी को भ्रमित कर सकती थीं।

लेकिन तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश कुमार ध्रुव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल पारंपरिक पुलिसिंग का सहारा लिया, बल्कि तकनीकी साक्ष्यों का ऐसा जाल बुना कि आरोपी का हर झूठ बेनकाब होता चला गया।
​विवेचना की वो खूबियां, जिसने दिलाई सफलता:
​वैज्ञानिक दृष्टिकोण: 
श्री ध्रुव के नेतृत्व में टीम ने घटनास्थल से सूक्ष्म साक्ष्य जुटाए। हस्तलेख विशेषज्ञ (Handwriting Expert) की रिपोर्ट और CCTV फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया, जिसने आरोपी के “अज्ञात हमलावर” वाले दावे की धज्जियां उड़ा दीं।
​त्वरित कार्रवाई: आरोपी जब रायपुर के रास्ते राउरकेला भागने की फिराक में था, तब सुरेश ध्रुव की टीम की तत्परता ही थी कि उसे रेलवे स्टेशन पर दबोच लिया गया।
​ठोस चार्जशीट: एक केस तब मजबूत होता है जब उसकी केस डायरी और चार्जशीट पुख्ता हो। डीएसपी ध्रुव द्वारा तैयार की गई विवेचना इतनी प्रभावी थी कि बचाव पक्ष के तमाम तर्कों के बावजूद कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (जघन्यतम) श्रेणी का अपराध माना।

​न्याय के पथ पर कर्तव्यपरायणता की मिसाल
​वर्तमान में ईओडब्लू/एसीबी रायपुर में डीएसपी पद पर कार्यरत सुरेश कुमार ध्रुव की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कानूनविदों का कहना है कि यदि विवेचना में कोई भी कसर रह जाती, तो आरोपी रवि शर्मा कानून की कमियों का फायदा उठाकर बच सकता था। उनके द्वारा जुटाए गए तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों ने ही अभियोजन पक्ष को कोर्ट में मजबूती प्रदान की।
​यह फैसला समाज में यह संदेश देता है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, यदि सुरेश कुमार ध्रुव जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी मामले की कमान संभाल रहे हों, तो न्याय होकर ही रहता है। भिलाई की जनता और पुलिस विभाग आज उनकी इस उपलब्धि और पेशेवर दक्षता पर गर्व कर रहा है।

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