बीजेपी के सुशासन में ‘साड़ी’ पर दाग ! महिला सचिव साड़ी घोटाले में लिप्त ? नारी सम्मान के नाम पर भी कमीशनख़ोरी,जांच में आंच…

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में कांग्रेस राज में अंजाम दिया गया,साड़ी घोटाला बीजेपी शासन में भी अपने पैर पसारे हुए है | इसका खुलासा उस वक़्त हुआ जब पहली ही धुलाई में ना केवल साड़ी का रंग निकल गया और सिकुड़कर छोटी हो गई,बल्कि उसकी लंबाई-चौड़ाई भी निर्धारित “मीटर” से कम आंकी गई|तस्दीक की जाती है,कि 6 मीटर के बजाए 5 मीटर से भी कम लंबी साड़ी महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लाभार्थी महिलाओं को वितरित की गई थी|

साड़ी घोटाले की प्रारंभिक जाँच में विभागीय सचिव के लेन-देन पर ही जाँच अधिकारियों की निगाहें टिक गई है,हालांकि,प्रभावशील सचिव ने खुद पर उठ रही उँगलियों के मद्देनज़र जाँच की दिशा भटकाने के प्रयास भी तेज़ कर दिए है| यह भी तस्दीक की जा रही है,कि “संदेही” महिला सचिव कांग्रेस के “भू-पे” दौर के बाद बीजेपी के कार्यकाल में भी महिला एवं बाल विकास विभाग में पैर जमाए हुए है| उनके लगभग 7 साल के कार्यकाल से कांग्रेस दौर से जमी कमीशन की पकड़ अब बीजेपी शासन में मुसीबत का सबब बन गई है|महिला सचिव के घेरे में कमीशन के ग्राफ़ का स्तर उच्च सूचकांक पर टिक गया है| 

छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सरकारी योजना के तहत महिलाओं को भेंट में दी गई घटिया साड़ी का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने हालिया जाँच के निर्देश दिए थे| लेकिन, विभागीय सचिव को बगैर हटाए जाँच करने से कनिष्ठ अधिकारियों की सांसे फूलने लगी है| साड़ी घोटाले की प्रारंभिक जाँच में ही चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे है| भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की “बू “आने पर महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव की कार्यप्रणाली पर ही अब  उंगलियाँ उठने लगी है|सूत्र तस्दीक करते है,कि पहले कांग्रेस राज में और अब फिर बीजेपी के सुशासन के दौर में दूसरी बार विभागीय सचिव ने बड़े घोटाले को अंजाम दिया है |

यह भी बताया जाता है,कि साड़ी की ख़रीदी और भुगतान के मामलों में जिस तर्ज़ पर वर्ष 2021-2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री “भू-पे” बघेल के कार्यकाल में वर्तमान सचिव ने गोलमाल किया था,ठीक इसी तर्ज़ पर वित्तीय वर्ष 2025 के भुगतान में भी खेला किया गया था| साड़ी घोटाले को अंजाम देने की प्रक्रिया में वित्तीय 2024-2025 की समाप्ति के छह दिन पहले अर्थात 25 मार्च 2025 को आनन फानन में कुछ खास फर्मो और सप्लायरों को लगभग 10 करोड़ का कार्यादेश (ऑर्डर) जारी किया गया था | 

सूत्र तस्दीक करते है,कि इस दौरान तत्कालीन विभागीय सचिव ने सप्लायरों से सीधे 35 फ़ीसदी कमीशन वसूल करने के बाद ही वर्क ऑर्डर जारी किए थे| जबकि,बीजेपी के सुशासन काल में वर्ष 2024-2025 में  कमीशन की इस रक़म में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी गई थी| नतीजतन,गुणवत्ताविहीन साड़ी की आपूर्ति कर दी गई| विभागीय जानकारी अनुसार,छत्तीसगढ़ शासन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं को दो- दो नग साड़ी देने का प्रावधान किया था| इसके तहत प्रत्येक वर्ष ग्रामोद्योग विभाग के माध्यम से महिलाओं  के लिए साडी की आपूर्ति की जाती है। साल 2024-25 में 1 लाख 94 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं के लिए 500 रुपये प्रति नग की दर से साडी की खरीदी की गई थी। इसके लिए स्पष्ट निर्देश भी जारी किए गए थे, 25 मार्च 2025 के कार्यदेशानुसार साड़ी की लंबाई 6.3 मीटर, जिसमे 5.5 मीटर साडी और 80 सेंटीमीटर ब्लॉउज के लिए गुणवत्तापूर्ण कपडे को उपलब्ध कराना था। महिला एवं बाल विकास विभाग ने करीब 9 करोड़ 7 लाख रुपये का, इसके लिए भुगतान प्रस्तावित किया था।

सूत्र बताते है,कि प्रारंभिक जांच में यह तथ्य भी सामने आया है,कि साड़ी सप्लाई करने वाली फर्म के प्रमुख शुभम अग्रवाल ने विभागीय सचिव से सांठ-गांठ करने के बाद ही साड़ी की आपूर्ति की थी| लेकिन,प्रभावशील सचिव के अभी भी पद में काबिज़ रहने के चलते जाँच में कई वास्तविक तथ्यों की अनदेखी की जा रही है| ताकि,निष्पक्ष जाँच को भटकाया जा सके| महिला एवं बाल विकास में कमीशनखोरी वर्षो से जारी बताई जाती है,तस्दीक की जा रही है,कि सचिव मैडम ने कई विभागीय योजनों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर शासन की छवि धूमिल की है| राज्य में महिलाओं को सम्मान और उपहार प्रदान करने के मामलों में “साड़ी भेंट” लोक-लुभावन परंपरा है| लेकिन,घटिया साडी प्रदान करने से महिलाओं में नाराजगी देखी जा रही है|

कई महिलाएं तस्दीक करती है,कि इस घोटाले से उनके आत्मसम्मान पर ठेस पहुंची है| प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं नई साड़ियों को दरकिनार कर पुरानी “यूनिफॉर्म साड़ी” पहनकर काम कर रही हैं।जबकि,कई केंद्रों पर महिलाएं बिना यूनिफॉर्म के ही ड्यूटी पर तैनात हैं। कार्यकर्ताओं ने आक्रोश जताते हुए कहा कि कपड़े की गुणवत्ता इतनी खराब है कि साड़ी पूरी तरह पारदर्शी है। कई महिला कार्यकर्ताओं का आरोप है, कि जो साड़ी प्रदान की गई है, वह बाजार में 250 रुपए या इससे भी कम कीमत में उपलब्ध है। प्रदेश की 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ी की खरीदी की गई थी| 

बीजेपी के सुशासन के दौर में अगस्त 2025 से फरवरी 2026 तक आंगनबाड़ी स्तर पर घटिया साड़ी का वितरण किया गया था।उधर, साडी खरीदी में भ्रष्टाचार और विवादों के सामने आने के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों से साड़ी की खेप की वापिसी पर ज़ोर दिया जा रहा है| बिलासपुर समेत कई जिलों के विभागीय संचालको ने इसके लिए हाथ-पांव मारना शुरू कर दिया है| विभागीय अधिकारी दावा कर रहे है,कि घटिया साड़ियों को बदलकर नई साड़ी दोबारा प्रदान की जाएगी| 

महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रीलक्ष्मी राजवाड़े की दलील है,कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को साड़ी सप्लाई का कार्यादेश दिया गया था।उनके मुताबिक,कुछ स्थानों से साड़ियों का रंग फीका पड़ने, लंबाईचौड़ाई कम होने और कपड़ा पतला होने की शिकायतें मिली हैं। जहां-जहां गुणवत्ताविहीन साड़ियों की सप्लाई की गई है,उन्हें वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। 

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