कंडम वाहनों में बच्चों की सवारी: कोरबा में स्कूल परिवहन व्यवस्था पर सवाल, पालक चिंतित.

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कोरबा/कटघोरा, 12 अगस्त 2025 : कटघोरा क्षेत्र में डीपीएस जमनीपाली और केंद्रीय विद्यालय गोपालपुर के लिए चलने वाले निजी स्कूल वाहनों की जर्जर हालत ने पालकों की चिंता बढ़ा दी है। लगभग 300 से 400 बच्चे रोजाना इस मार्ग से इन स्कूलों में पढ़ने जाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा सवालों के घेरे में है।

15-20 साल पुराने वाहन, न परमिट न फिटनेस

पालकों के मुताबिक, स्कूल प्रबंधन के पास अपने बस या वैन न होने के कारण बच्चों को 15-20 साल पुराने निजी वाहनों—जैसे गामा, क्रूजर और बोलेरो—में लाया-ले जाया जा रहा है। इन वाहनों के पास न तो स्कूल परमिट है और न ही फिटनेस सर्टिफिकेट। कई गाड़ियों के टायर-चक्के घिसे हुए हैं और मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है।

एक जीप में 8 नहीं, 25 बच्चे ठूंसकर

आठ सीटर वाहनों में 20 से 25 बच्चों को ठूंसकर भरने का चलन आम हो गया है। हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद प्रति छात्र परिवहन शुल्क भी भारी वसूला जा रहा है। भीड़भाड़ और वाहन की खराब हालत को देखते हुए दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है।

परिवहन विभाग और पुलिस की लापरवाही

पालकों का कहना है कि यातायात पुलिस कई बार इन वाहनों को रोकती है, लेकिन कथित लेन-देन के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता है। परिवहन विभाग द्वारा फिटनेस जांच और परमिट सत्यापन में भी ढिलाई बरती जा रही है। इससे वाहन मालिकों को नियम तोड़ने की खुली छूट मिल गई है।

पालकों की मांग: तुरंत कार्रवाई हो

स्थानीय अभिभावकों ने परिवहन और यातायात विभाग से मांग की है कि स्कूल वाहनों की नियमित जांच की जाए, ओवरलोडिंग पर सख्ती से रोक लगे और बिना परमिट व फिटनेस वाले वाहनों को तुरंत बंद किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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