नईदिल्ली ।एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया पेज के तौर पर शुरू हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अब राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुकी है। कुछ ही दिनों में यह ऑनलाइन समूह सोशल मीडिया से निकलकर राजनीति, पुलिस कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट और साइबर अपराध तक पहुंच गया है। देश के अलग-अलग राज्यों में इसके नाम पर प्रदर्शन हो रहे हैं, नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं और अब इस संगठन को लेकर कानूनी लड़ाई भी शुरू हो गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि समूह के संस्थापक के घर के बाहर पुलिस तैनात करनी पड़ी, जबकि साइबर अपराधी भी इसके नाम का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने में जुट गए हैं। हाल ही में आधिकारिक अकाउंट पर राजस्थान के जयपुर का एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें कुछ युवक-युवतियां कॉकरोच की वेशभूषा पहनकर भ्रष्टाचार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते नजर आए. पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया कि कॉकरोच अपनी आवाज उठा रहे हैं, ठीक उसी तरह जैसे हम चाहते हैं — शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से। इससे पहले ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में भी युवाओं ने नौकरी भर्ती में देरी के विरोध में इसी प्रतीक का इस्तेमाल किया था। बताया जा रहा है कि ष्टछ्वक्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। यह संख्या कई राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के सोशल मीडिया आधार से भी अधिक बताई जा रही है. समूह की लोकप्रियता लगातार बढऩे के साथ ही यह सरकार और प्रशासन की नजरों में भी आ गया है। अब इस पूरे मामले ने कानूनी और राजनीतिक रंग ले लिया है। इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कथित तौर पर सुनवाई के दौरान कॉकरोच और पैरासाइट जैसे शब्दों का उपयोग किए जाने की चर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणी फर्जी डिग्रीधारी लोगों के संदर्भ में थी। लेकिन इसी टिप्पणी से प्रेरित होकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में ष्टछ्वक्क संस्थापक ्र के परिवार के घर के बाहर पुलिस तैनात की गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एहतियातन उठाया गया है ताकि सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे इस मुद्दे के कारण किसी प्रकार की भीड़ या तनाव की स्थिति न बने। हालांकि अभिजीत दिपके ने अमेरिका से मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें एक वीडियो भी भेजा गया जिसमें कुछ लोग उनके घर के बाहर पहुंचने की बात कह रहे थे।
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