कोरबा जिले के किसानों को खाद वितरण हेतु मापदण्ड तय

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कोरबा। जिले के किसानों को इस वर्ष पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने के लिए विभाग के द्वारा लगातार प्रयास जारी है। शासन के द्वारा खाद वितरण हेतु आवश्यक मापदण्ड तय किये गये है जिसमें खरीफ 2025 में कृषक को वितरित उर्वरक यूरिया की 80 प्रतिशत मात्रा एवं डी.ए.पी की 60 प्रतिशत मात्रा का ही वितरण खरीफ 2026 में किया जाना है। यूरिया की शेष 20 प्रतिशत मात्रा पारंपरिक यूरिया की आपूर्ति होने पर की जायेगी, अन्यथा की स्थिति में नैनो यूरिया के रूप में प्रदाय की जायेगी। डी.ए.पी. की शेष 40 प्रतिशत मात्रा अन्य वैकल्पिक एन.पी.के. उर्वरकों अथवा नैनो डी.ए.पी. के माध्यम से दी जायेगी। किसानों के लिए यूरिया एवं डी.ए.पी. हेतु नैनो यूरिया, डीएपी समितियों में पर्याप्त भंडारण किया जायेेगा। प्रदेश के समस्त सीमांत कृषक (जिनकी भूमि धारिता 2.5 एकड़ तक होती है) को उपरोक्तानुसार निर्धारित मात्रा एक मुश्त प्रदाय की जायेगी। लघु कृषक (जिनकी भूमि धारिता 2.5 से 5 एकड़ तक होती है) को निर्धारित मात्रा में से यूरिया 2 किश्त में प्रदाय की जायेगी एवं बड़े कृषक (जिनकी भूमि धारिता 5 एकड़ से अधिक है) को उपरोक्तानुसार निर्धारित मात्रा में से यूरिया 3 किश्त में (द्वितीय किश्त प्रथम किश्त के 20 दिवस एवं तृतीय किश्त द्वितीय किश्त के 20 दिवस उपरांत) प्रदाय की जायेगी। उक्त निर्देष अनुसार कृषक को देय उर्वरक का निर्धारण बोरी की गणना के आधार पर किया जायेगा। विगत वर्ष (खरीफ 2025) वितरित उर्वरक की गणना बोरी में करने के उपरांत यूरिया हेतु 80 प्रतिशत एवं डी.ए.पी. हेतु 60 प्रतिशत की गणना बोरी में ही की जायेगी। गणना में यदि पूर्णांक संख्या प्राप्त न हो तो निकटतम पूर्णांक को मान्य किया जायेगा अर्थात यदि बोरी की गणना 7.2 या 7.8 प्राप्त हो तो क्रमशः 7 एवं 8 बोरी मान्य किया जायेगा।
वैकल्पिक उर्वरकों, नैनो यूरिया एवं डीएपी के साथ-साथ हरी खाद व जैव उर्वरक जैसे नील हरित काई, एजोस्पिरिलियम, पीएसबी इत्यादि केउपयोग को बढ़ावा देने हेतु कृषि विभाग द्वारा व्यापक तैयारी की गई है। समितियों में हरी खाद के लिए ढेंचा एवं मूंग बीज का भंडारण प्रारंभ कर दिया गया है। कृषकों से नील हरित काई का उत्पादन कराया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा अनुसार उर्वरक उपयोग संबंधी पोस्टर एवं पाम्पलेट वितरित किए जा रहे हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के स्थान पर वैकल्पिक मिश्रित उर्वरक जैसे- एसएसपी, टीएसपी, एनपीके का उपयोग करें। जिससे यूरिया की खपत कम होगी तथा फसल को संतुलित पोषक तत्व प्राप्त होंगे। जिले में उर्वरकों की उपलब्धता के दृष्टिगत उप संचालक कृषि, कोरबा द्वारा किसान को सलाह दी गई है कि वह उर्वरकों का अत्यधिक क्रय एवं उनके प्रयोग से बचे तथा निकटस्थ समिति अथवा निजी विक्रय केन्द्रों से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा के अनुसार फसल एवं रकबा के आधार पर उर्वरक का उठाव करें।

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