शिक्षाकर्मी भर्ती 2011 प्रक्रिया के तहत निलंबित शिक्षकों को किया जाए बहाल, प्रशासन की गलती के कारण नियुक्ति पा चुके अभ्यार्थियों का भविष्य बर्बाद, संघर्षशील निलंबित शिक्षाकर्मी संघ पाली की पत्रकारवार्ता

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कोरबा। प्रेस क्लब तिलक भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान संघर्षशील निलंबित शिक्षाकर्मी संघ पाली के नरेंद्र राठौर, प्रदीप भास्कर, जितेंद्र वैष्णव सहित अन्य ने कहा कि शिक्षाकर्मी भर्ती 2011 प्रक्रिया के तहत निलंबित शिक्षकों को बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009-10 में जनपद पंचायत पाली में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की नियुक्ति के लिए 5 फरवरी 2011 एवं 7 फरवरी 2011 को काउंसिलिंग आयोजित की गई थी एवं नियुक्ति पत्र जारी किया गया था। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत पाली एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता बरते जाने के फलस्वरूप कलेक्टर कोरबा द्वारा दिनांक 6 अप्रैल 2011 को छत्तीसगढ़ पंचायतराज अधिनियम 1993 की धारा 85 (1) के तहत भर्ती प्रक्रिया को निलंबित किया गया। जिसके तहत नियुक्ति प्राप्त शिक्षकों को भी निलंबित कर दिया गया। उक्त कार्यवाही के विरुद्ध उनके द्वारा उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की गई थी। उच्च न्यायालय बिलासपुर के डिवीजन बेंच द्वारा दिनांक 19 जुलाई 2013 को आदेश पारित किया गया, जिसमें निर्णय दिया गया कि कलेक्टर कोरबा द्वारा की गई कार्यवाही उचित है, फिर भी यदि नियम अनुमति देता हो एवं कोई मेरिट लिस्ट उपलब्ध हो और पद रिक्त हो तो प्रशासन गुणदोष के आधार पर नियुक्ति कर सकता है। चूंकि आज तक कोई नियुक्ति या बहाली की कार्यवाही नहीं अपनाई गई है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा छ.ग. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को आवेदन दिया गया था। वहां से जांच हेतु पत्र भी आ गया था, परंतु पत्र क्रमांक 816 दिनांक 22 नवंबर 2014 पर कोई कार्यवाही नहीं किया गया। फिर उनके द्वारा वर्ष 2015 में हाईकोर्ट में पुनः अपील की गयी जो इनके झूठे शपथ पत्र के अधार पर खारिज हो गया। इनके द्वारा झूठा हलफनामा तात्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी पाली एमआर कैवर्त द्वारा दिया गया कि कोई चयन सूची जनपद पंचायत पाली द्वारा जारी नहीं किया था। जबकि कोर्ट का निर्णय 22 नवंबर 2023 को आने के पश्चात् उन्हें सूचना के अधिकार के तहत चयन सूची जनपद पंचायत पाली द्वारा उपलब्ध करा दिया गया। चूंकि चयन सूची उपलब्ध रहने के बाद भी कोर्ट में झूठा हलफनामा दिया गया जो इनके कार्यप्रणाली पर सवाल उठता है। उनके द्वारा हाईकोर्ट में रिव्यु पिटीसन भी दायर किया गया, लेकिन कोर्ट द्वारा इस पिटीसन को खारिज कर दिया गया। चूंकि चयन सूची उपलब्ध होने के बाद भी उन्हें बहाल नहीं किया गया और 126 अभ्यार्थियों ने स्कूलों में पदभार भी ग्रहण कर लिया था, जो आज तक अपनी बहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा कोई गलती नहीं हुई थी, प्रशासन की गलती के कारण नियुक्ति पा चुके अभ्यार्थियों का भविष्य बर्बाद कर दिया गया, जिससे वे मानसिक एवं आर्थिक रूप से बहुत परेशान हो गए हैं।

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