अयोध्या : पीएम मोदी ने किया राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण; बोले- ‘गुलामी की मानसिकता ने राम को भी काल्पनिक बता दिया, 10 साल में मुक्ति दिलाकर रहेंगे’
अयोध्या (उत्तर प्रदेश): सदियों के इंतजार के बाद, आज राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना की गई। अभिजीत मुहूर्त के शुभ समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर स्वयं भगवा ध्वज फहराया। इस दौरान पूरा परिसर जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा।
ध्वजारोहण के बाद पीएम मोदी ने एक ऐतिहासिक संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने राम मंदिर को केवल आस्था का नहीं, बल्कि मानसिक गुलामी से मुक्ति और विकसित भारत की नींव का प्रतीक बताया। इस मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।
पीएम मोदी के संबोधन के 3 सबसे बड़े संदेश
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में मैकाले की शिक्षा नीति से लेकर विकसित भारत के लक्ष्य तक कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
1. ‘मानसिक गुलामी’ पर वार: पीएम ने कहा कि 1835 में मैकाले नाम के अंग्रेज ने भारत में मानसिक गुलामी की नींव रखी थी। उन्होंने संकल्प लिया कि आने वाले 10 वर्षों में हम इस मानसिक गुलामी की मानसिकता से मुक्ति दिलाकर रहेंगे। पीएम ने कहा कि इसी गुलामी की मानसिकता ने राम को भी काल्पनिक बता दिया था।
2. वचन और रामराज्य: उन्होंने कहा कि ये धर्म ध्वज प्रेरणा बनेगा, क्योंकि रामराज्य का अर्थ है प्राण जांए पर वचन न जाए’ (जो कहा जाए, वही किया जाए)। विकसित भारत (2047) का निर्माण तभी होगा जब हम इस भावना से आगे बढ़ेंगे।
3. अर्थव्यवस्था और आस्था: पीएम ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक 45 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या दर्शन को आ चुके हैं, जिससे अयोध्या और आसपास के लोगों का आर्थिक विकास हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
धर्म ध्वज का विशेष प्रतीकात्मक महत्व
राम मंदिर के शिखर पर फहराया गया यह ध्वज कई महत्वपूर्ण प्रतीकों को दर्शाता है, जिनका जिक्र पीएम मोदी और मोहन भागवत ने किया:
प्रतीक (Symbol) महत्व और अर्थ (Significance) |
भगवा रंग रामराज्य की कीर्ति, धर्म की रोशनी और आस्था की अमरता। | कोविदार वृक्ष रघु%















