KORBA:कन्फ्यूज करता नगर निगम,नए पार्षदों का नाम न पता,पुराने से काम चल रहा….

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शपथ ग्रहण के 3 माह पूरे हुए लेकिन बोर्ड नहीं बदलवा सके अधिकारी

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा में 10 साल बाद सत्ता परिवर्तन हुआ। भाजपा के बहुत से पार्षद जीत कर आए, कांग्रेस के भी कुछ पार्षद जीते तो कुछ पार्षद रिपीट हुए। रिपीट हुए पार्षदों को छोड़ दें तो जो पार्षद नए चुन कर आए हैं और जिन्हें एमआईसी का मेम्बर बनाया गया है, उनके बारे में उनके वार्ड से गुजरने वाले लोगों को पता नहीं चल पा रहा है।
इसे निगम अधिकारियों की अनदेखी कहें या बेख्याली की वजह से आज भी जब वार्डों में लगे बोर्ड पर निगाह पड़ती है तो बड़ा कंफ्यूजन हो जाता है। सर्वमङ्गला पुल से पहले वार्ड नंबर 2 पटेलपारा की सीमा में आज भी संतोष राठौर (कांग्रेस) बतौर पार्षद और एमआईसी सदस्य शोभा बढ़ा रहे हैं जबकि वे न तो पार्षद हैं और एमआईसी सदस्य भी नहीं हैं। ना तो उनके नाम के सामने पूर्व पार्षद लिखा गया है ना पूर्व एमआईसी सदस्य। वार्ड 1 रामसागर पारा में वर्तमान पार्षद युगल कैवर्त (भाजपा) हैं। पूर्व वार्ड 1 को परिसीमन कर पटेलपारा नया वार्ड क्रमांक 2 बनाया गया है तथा वार्ड के पार्षद ईश्वर पटेल भारतीय जनता पार्टी से ताल्लुक रखते हैं।

वार्ड 2 के वर्तमान पार्षद ईश्वर पटेल

अब साइन बोर्ड को देखने के बाद धोखा होना लाजिमी है जबकि इस वार्ड का नाम पटेलपारा और रामसागर पारा वार्ड कहीं और है।
इसी तरह से प्रायः सभी 67 वार्ड में यही हालात बने हुए हैं।

नए पार्षदों को नहीं कोई जानकारी

इस बात को लेकर चर्चा करने पर नए पार्षदों ने भी आश्चर्य जताया कि 15 फरवरी 2025 को नगर पालिक निगम का निर्वाचन होने और 3 मार्च को शपथ ग्रहण करने के बाद तीन माह पूरे हो चुके हैं लेकिन आज तक उनके निवास अथवा कार्यालय के सामने उनके नाम का बोर्ड नहीं लगाया जा सका है। नए पार्षदों को यह भी जानकारी नहीं है कि नगर निगम पुराने पार्षदों के निवास/कार्यालय/सड़क मार्ग पर इंगित करने वाले लगे बोर्ड को उखाड़ कर नए पार्षदों के निवास के समक्ष अथवा उनके निवास मार्ग में लगाएगी या ये साइन बोर्ड यथावत रहेंगे और नए बोर्ड लगाने का कोई टेंडर होगा फिर नए बोर्ड लगाए जाएंगे… ! यह व्यवस्था किस तरह की होगी, कोई जानकारी देने वाला नहीं है।

जोन प्रभारियों को भी फुर्सत नहीं झांकने की
नगर पालिक निगम ने कालांतर में व्यवस्थाओं को विकेंद्रित करने के लिए जोन सिस्टम लागू किया है। प्रत्येक जोन के अंतर्गत 8 से 10 वार्ड शामिल किए गए हैं लेकिन जोन की केंद्रीयकृत की व्यवस्था होने के बावजूद जबकि दायरा सिमट गया है, नए परिसीमन भी हुए हैं और इस परिसीमन से अधिकारी अवगत हैं। परिसीमन के बाद चुनाव हुआ, नए पार्षदों की सूची भी जारी हुई किंतु उनके वार्ड सहित पार्षद के नाम के बोर्ड आज पर्यंत लगवाए नहीं जा सके हैं। लगभग 9 अरब के बजट वाले नगर निगम का आलम यह है कि 90 दिनों के बाद भी आम जनता को दृश्यपटल के माध्यम से यह जानकारी नहीं हो पा रही है कि उस वार्ड का नाम,क्रमांक और वर्तमान पार्षद कौन है….?

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