कोरबा जिले के शासकीय उचित मूल्य दुकान में चना वितरण बंद होने का मुद्दा अब जनता के बीच गंभीर चिंता का विषय बन गया है। जिले के हजारों हितग्राही यह सवाल पूछ रहे हैं कि शासन की ओर से मिलने वाला चना आखिर कब उपलब्ध होगा। सत्ता परिवर्तन के बाद से वितरण व्यवस्था जिस तरह धीमी हुई है, उससे उपभोक्ताओं की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि अगस्त माह 2025 से अब तक, यानी करीब पाँच महीने, किसी भी शासकीय उचित मूल्य दुकान तक चना की आपूर्ति नहीं की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर के वार्डों तक, सभी जगह उपभोक्ताओं का एक ही सवाल है—चना बंद कर दिया गया है या देरी किसी प्रशासनिक कारण से हो रही है? उपभोक्ताओं का कहना है कि चावल, चीनी और नमक की तरह चना भी उनके लिए महत्वपूर्ण खाद्य सामग्री है, जिसे बंद होने से दैनिक उपयोग और पोषण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कई हितग्राही बताते हैं कि चना मिलने पर परिवार के खर्च में काफी राहत रहती थी, लेकिन पाँच माह से वितरण रुकने के कारण उन्हें बाजार से महंगे दाम पर चना खरीदना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि खाद्य विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जानकारी या बयान जारी नहीं किया गया है। विभागीय चुप्पी इस मुद्दे को और पेचिदा बना रही है। अधिकारी इस देरी के कारणों पर मौन हैं, जिससे जनता में तरह-तरह की आशंकाएँ पैदा हो रही हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द स्थिति को स्पष्ट करेगी और वितरण में आ रही बाधाओं को दूर करेगी, ताकि हितग्राहियों को फिर से नियमित रूप से चना उपलब्ध हो सके। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि बंद पड़ा चना आवंटन आखिर कब पुनः शुरू होगा और देरी की वास्तविक वजह क्या सामने आती है।
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