कोरबा : मेडिकल कॉलेज बना मौत का अड्डा – खून के धंधेबाज़ों ने छीनी 8 साल के मासूम की जान, 3 घंटे की लापरवाही से बुझा घर का चिराग, परिजनों का आरोप – लैब टेक्नीशियन ने ब्लड ग्रुप गलत लिख दिया, सही खून खोजते-खोजते निकल गई जान, बजरंग दल ने दी चेतावनी – अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो इसे “हत्या” मानकर होगा उग्र आंदोलन

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कोरबा।
शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिसे इलाज का मंदिर होना चाहिए था, आज लोगों की नजर में मौत का अड्डा बन चुका है। यहां लापरवाही और भ्रष्टाचार ने एक और मासूम की जान निगल ली। 8 वर्षीय मासूम नंदलाल चौहान, जो पत्थलगांव से बेहतर इलाज की तलाश में परिवार के साथ कोरबा आया था, यहां की गंदी व्यवस्था का शिकार बन गया।

डॉक्टरों ने युवक को खून चढ़ाने की सलाह दी। ड्यूटी नर्स ने सैम्पल लेकर लैब भेजा। लेकिन यहीं हुआ सबसे बड़ा खेल। लैब टेक्नीशियन ने असली ब्लड ग्रुप “O पॉजिटिव” की जगह “B पॉजिटिव” दर्ज कर दिया और उसी आधार पर पर्ची थमा दी गई।

परिजन जब बिलासा ब्लड बैंक पहुंचे तो क्रॉस मैचिंग में पूरी सच्चाई सामने आई – युवक का असली ब्लड ग्रुप तो O पॉजिटिव था। आनन-फानन में दूसरी पर्ची बनाई गई, नया डोनर ढूंढा गया। लेकिन इस जद्दोजहद में 3 से 4 घंटे बर्बाद हो गए। और इतने समय में अस्पताल की लापरवाही ने एक घर का चिराग बुझा दिया।

पहले भी हो चुकी हैं मौतें, पर हर बार दबा दी जाती जांच

परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। मेडिकल कॉलेज में पहले भी 3 मरीज इसी तरह लापरवाही की भेंट चढ़ चुके हैं। हर बार जांच का नाटक होता है, लेकिन दोषियों को बचा लिया जाता है। विभागीय नोटिस और फाइलें बदल दी जाती हैं, मगर हालात जस के तस रहते हैं।

बजरंग दल की चेतावनी – हत्या का केस बनेगा

जिला संयोजक राणा मुखर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि हत्या है। अगर कल तक जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो इसे “हिंदू युवक की हत्या” मानकर बजरंग दल उग्र आंदोलन छेड़ेगा।

मेडिकल सुपरिटेंडेंट पर निशाना – इलाज नहीं, धंधा

लोगों का सीधा आरोप मेडिकल सुपरिटेंडेंट गोपाल कंवर पर है। उनका कहना है कि गोपाल कंवर ने कभी भी अव्यवस्था को दूर करने की कोशिश नहीं की। अस्पताल में इलाज से ज्यादा ध्यान निजी कमाई पर दिया जाता है। कुछ समय पहले भी एक नर्स की गलती से मरीज की जान पर बन आई थी, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अब लोग खुलेआम कह रहे हैं कि मेडिकल कॉलेज इलाज का संस्थान नहीं, बल्कि खून का बाजार और मौत का धंधा बन चुका है।

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