कोरबा। मानसून की पहली बारिश के बाद कोरबा की वादियां, जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक पर्यटन स्थल हरियाली की चादर ओढ़ चुके हैं। प्रकृति के इस मनमोहक रूप का आनंद लेने बड़ी संख्या में लोग इन स्थलों पर पहुंच रहे हैं। इसी बीच वन्यजीव रेस्क्यूर जितेंद्र सारथी ने लोगों से प्रकृति संरक्षण को लेकर भावुक अपील की है।
उन्होंने कहा कि पिकनिक या घूमने के बाद कई लोग प्लास्टिक की बोतलें, शराब की कांच की बोतलें, डिस्पोजेबल सामग्री और अन्य नष्ट न होने वाला कचरा जंगलों व प्राकृतिक स्थलों पर ही छोड़ देते हैं। यह न केवल पर्यावरण को प्रदूषित करता है, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी गंभीर खतरा बन जाता है। कई बार जंगली जानवर प्लास्टिक निगल लेते हैं, कांच से घायल हो जाते हैं और उनके जीवन पर संकट आ जाता है।
जितेंद्र सारथी ने बताया कि बारिश के मौसम से लेकर ठंड तक कोरबा जिले के पर्यटन स्थलों पर भारी मात्रा में गंदगी जमा हो जाती है। शहर की सफाई तो नगर निगम कर सकता है, लेकिन जंगलों और प्राकृतिक स्थलों पर फैली गंदगी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? उन्होंने कहा कि जब तक लोगों के मन में प्रकृति संरक्षण का भाव नहीं आएगा, तब तक वास्तविक बदलाव संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि इंसान कुछ घंटों के मनोरंजन के लिए अनजाने में उन बेजुबान वन्यजीवों के पूरे जीवन को खतरे में डाल देता है, जिनका यह प्राकृतिक घर है। इसलिए सभी से अपील है कि जो भी सामान अपने साथ लेकर जाएं, उसे वापस भी साथ लाएं और प्रकृति को उतना ही स्वच्छ छोड़ें, जितनी स्वच्छ अवस्था में वह हमें मिली थी।
उन्होंने अंत में संदेश दिया कि “प्रकृति केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और वन्यजीवों की भी धरोहर है। आइए, इसकी सुंदरता को संवारें, बिगाड़ें नहीं।”















