रायपुर : रायपुर की ACB -EOW की स्पेशल कोर्ट के आदेश पर एजेंसी ने एक्शन लेते हुए 2010 बैच के निलंबित IAS समीर विश्नोई की लगभग 20 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली है| समीर विश्नोई लंबे समय तक जेल में रहने के उपरांत अभी जमानत पर रिहा है| उन्हें DMF और कोल खनन घोटाले में चार्जशीट किया गया था| विश्नोई के नाम DMF समेत कई बड़े घोटाले दर्ज़ है,इस फेहरिस्त में एक चिप्स घोटाला भी शामिल बताया जाता है| एजेंसी ने कोल खनन परिवहन घोटाले ने नामज़द किए गए समीर विश्नोई की अचल संपत्ति अटैच कर ली है|

यह भी बताया जाता है,कि “चिप्स” (CHiPS – Chhattisgarh Infotech Promotion Society) घोटाले में भी समीर विश्नोई भ्रष्टाचार के मुख्य कर्ता-धर्ता के रूप में तत्कालीन “भू-पे” सरकार के बैनर तले अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे थे| इस प्रकरण में ED की वैधानिक कार्यवाही अभी सिर्फ “चिप्स” मुख्यालय में छापेमारी तक सीमित बताई जाती थी| लेकिन,अब सूत्रों द्वारा तस्दीक की जाती है,कि छत्तीसगढ़ “चिप्स” घोटाले की लंबे अरसे से बंद पड़ी फ़ाइल के जल्द खुलने के आसार है| छापेमारी में जप्त दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइस की पड़ताल लगभग ख़त्म होने की कगार पर है| छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी (CHiPS) के रायपुर स्थित मुख्यालय में लगभग 3 वर्ष पूर्व ED ने छापामार कार्यवाही को अंजाम दिया था |

इस बीच,ख़बर आ रही है,कि ACB-EOW ने अपनी कार्यवाही करते हुए लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य की बेनामी संपत्तियों को अटैच कर लिया है| जांच में सामने आया है,कि अवैध कमाई को छिपाने के लिए समीर विश्नोई ने अपनी पत्नी प्रीति बिश्नोई के नाम पर लगभग आधा दर्जन फर्म बनाई थी। आईएएस दंपति इन फर्मों के जरिए जमीन, प्लॉट और अन्य अचल संपत्तियों में निवेश किया करते थे। एजेंसियों ने इन संपत्तियों को जब्त कर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।जानकारी के मुताबिक,ACB और EOW की टीम ने महासमुंद जिले में लगभग 22 एकड़ जमीन,नया रायपुर में स्थित प्लॉट और रायपुर के गायत्री नगर इलाके में बने मकान समेत कई संपत्तियों को सीज किया है।

जांच एजेंसियों का दावा है,कि यह कार्रवाई ठोस सबूत मिलने के बाद की गई है।इतना ही नहीं, जांच में यह भी पता चला है कि अवैध धन को छिपाने के लिए विश्नोई ने अपने करीबी नाते-रिश्तेदारों के नाम पर भी कई संपत्तियों की खरीद-फ़रोख़्त की थी |अब एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं, ताकि लेन-देन और निवेश के पूरे तंत्र का खुलासा किया जा सके। ACB-EOW की विशेष अदालत ने संज्ञान में लाई गई संपत्तियों को हाल ही के दिनों में अटैच करने का आदेश दिया था।

माना जा रहा है,कि आने वाले दिनों में विश्नोई की वो बेनामी संपत्तियां भी अटैच की जा सकती है,जो अभी तक एजेंसियों के संज्ञान में नहीं आई है या फिर जाँच पड़ताल के दायरे में है| सूत्रों के मुताबिक,ऐसी बेनामी जमीने और फ़ार्म हाउस पाकिस्तानी-सिंधी समुदाय से जुड़े जमीन के कुछ चुनिंदा सौदागरों के नाम दर्ज है|

सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि नई राजधानी से सटे ज़ोरा एवं अन्य इलाको में विश्नोई एंड कंपनी ने बड़े पैमाने पर सिर्फ जमीनों पर निवेश किया था| उन्होंने तत्कालीन मुख़्यमंत्री बघेल की निलंबित उपसचिव सौम्या चौरसिया और कोयला माफ़िया सूर्यकांत तिवारी के साथ मिलकर जमीनों की खरीद-फ़रोख़्त का उपक्रम शुरू किया था| इससे जुड़े कई कच्चे-पक्के सौंदों को एग्रीमेंट व बिक्री नामा के जरिए अंजाम दिया गया था| यह भी बताया जा रहा है,कि निलंबित IAS समीर विश्नोई की नामी-बेनामी संपत्तियों को लेकर आने वाले दिनों और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

फ़िलहाल,ACB-EOW की कार्यवाही भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश मानी जा रही है। जांच एजेंसियां अब विश्नोई की अन्य संभावित संपत्तियों और संदिग्ध लेन-देन की भी पड़ताल में जुटी हैं, जिससे मामले का दायरा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।















