बोधगया महाबोधि मंदिर प्रबंधन को लेकर मेत्ता संघ का ज्ञापन, शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन,देखिए विडिओ

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कोरबा | JB News Korba | Manish Jaiswal मेत्ता संघ (Metta Sangha) ने बोधगया महाबोधि मंदिर (बिहार) के प्रबंधन अधिनियम 1949 को निरस्त कर पूर्ण प्रबंधन बौद्ध अनुयायियों को सौंपने की मांग को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।

संघ का कहना है कि विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर भगवान बुद्ध की पवित्र साधना भूमि है, ऐसे में मंदिर का संचालन केवल बौद्ध अनुयायियों द्वारा किया जाना चाहिए। वर्तमान में “महाबोधि मंदिर अधिनियम 1949 (बी.टी. एक्ट)” के अंतर्गत मंदिर प्रबंधन में गैर-बौद्धों की हिस्सेदारी होने से यह ऐतिहासिक धरोहर बौद्ध अनुयायियों की मूल भावना के विपरीत है।

संघ ने आरोप लगाया कि भारतीय संविधान की धारा 25, 26, 29 और अनुच्छेद 13 का उल्लंघन कर मंदिर प्रबंधन से बौद्धों को वंचित किया गया है। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी और अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों का संचालन केवल उनके अनुयायियों द्वारा ही किया जाता है, ऐसे में बौद्धों के सबसे बड़े तीर्थ स्थल को लेकर भेदभाव अस्वीकार्य है।

मेत्ता संघ ने 1 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक महाबोधि महाबिहार भूमि आंदोलन के तहत देशभर में शांति पूर्ण आंदोलन की घोषणा की है। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में बौद्ध अनुयायियों ने प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों पर जोर दिया।

राजनांदगांव में हुए इस शांतिपूर्ण धरने में बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी, महिलाएं, युवा और भिक्षु धम्मरत्न मौजूद रहे। उन्होंने बुद्ध ध्वज लहराकर और नारे लगाकर महाबोधि मंदिर का संपूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग दोहराई।

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