कोरबा – एसईसीएल कुसमुंडा खदान में सुरक्षा पर एक बार फिर से सवाल उठने लगा है। रात के अंधेरे में डीजल चोरों की धर पकड़ करने वाली त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवान दिन के समय में अवैध लोडरो पर निगरानी कैसे नहीं कर पाई। अब इन लोडरो के खदान अंदर घुसने और कार्य करने को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। अवैध लोडर का खदान में प्रवेश करना न सिर्फ सुरक्षा में चूक बताई जा रही है बल्कि बूम बैरियर जैसे सुरक्षा सिस्टम में किए गए खर्च भी अब सवालों के घेरे में है।

आपको बता दें पिछले 6 महीने से कोरबा जिले के मेगा प्रोजेक्ट एसईसीएल कुसमुंडा खदान में अवैध लोडर की भरमार देखने को मिली जिसकी खबर प्रबंधन के मुखिया AGM सचिन पाटील तक भी पहुंचाया गया लेकिन प्रबंधन विराम लगाने में नाकाम रही। प्रबंधन द्वारा इस मामले को लेकर जरूर त्रिपुरा स्टेट राइफल्स को एक पत्राचार के माध्यम से अवैध पे लोडरों को हटाने और कार्रवाई करने की निर्देश दिए थे जो कि कुसमुंडा खदान में अवैध पे लोडर चलने की पुष्टि भी कर रहा है। लेकिन माया के खेल के सामने TSR भी नतमस्तक हो गई और कार्यवाही केवल कागजों तक सिमट कर रह गई।
अवैध लोडर के कार्य करने का सिलसिला जारी रहा जिसको लेकर त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के असिस्टेंट कमांडेड मिहिर दत्ता से मिलकर जानकारी देते हुए करवाई करने एवं रोक लगाने निवेदन भी किया गया लेकिन वह भी केवल हवा हवाई तक सीमित रहा। अवैध लोडर खदान में कार्य कर रहे हैं जिसका साक्ष्य देने के बावजूद ना तो कोई कार्रवाई हुई और ना ही इस पर रोक लगाई गई।
इस तरह की अवैध गतिविधियां एसईसीएल के मेगा प्रोजेक्ट कुसमुंडा खदान में कोयले के उत्पादन एवं उसकी सुरक्षा पर सवाल खड़े करने लगी है जिससे भारत सरकार को भारी आर्थिक क्षति हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बगैर अनुमति के अगर एक मोटरसाइकिल भी खदान के अंदर प्रवेश नहीं कर सकती तो इतना भारी भरकम पे लोडर बूम बैरियर एवं त्रिपुरा राइफल्स जवान के मौजूदगी में खदान के अंदर कैसे प्रवेश कर गई? क्या सुरक्षा में तैनात TSR के सुरक्षाकर्मी ही सुरक्षा में सेंध लग रहे हैं?
सूत्रों की माने तो अवैध लोडर के मामले में एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन के एक जिम्मेदार अधिकारी के मिले होने की खबर सामने आ रही है जो लंबे समय से पदस्थ है। सूत्रों का दावा यह भी है कि ऐसे अवैध लोडर से अधिकारी द्वारा अवैध उगाही भी की जाती है। अधिकारी की चर्चा इतनी है कि कोयले के डीओ से लेकर कोल लिफ्टिंग एवं स्टीम कोल सब पर अधिकारी की मेहरबानी है।
अधिकारी की चर्चा इस बात की भी है कि छोटे पद पर होने के बाद भी बड़े पद का जिम्मा कैसे संभाल रहे हैं? क्या यह सब माया का खेल है जिसमें सभी ने अपनी आंखें बंद कर ली है और माया के खेल का हिस्सा बनकर भारत सरकार को चुना लगा रहे है?















