एथेनॉल नीति से महंगी हुई चीनी-दाल? कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

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पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की केंद्र सरकार की नीति पर कांग्रेस हमलावर, चीनी और दाल की बढ़ती कीमतों को बताया इसका असर। जानें पूरा मामला।

रायपुर में कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति को निशाने पर लिया है। राजीव भवन स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति के चलते बाजार में चीनी की कीमतें बढ़ गई हैं, और अब इसका असर दाल की कीमतों पर भी दिखने लगा है।

दीपक बैज के मुताबिक, केंद्र सरकार की नीतियों का सीधा बोझ आम आदमी की रसोई पर पड़ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार की प्राथमिकताएं जनहित से ज्यादा दूसरी दिशा में हैं, जिसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब देश भर में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) नीति को लेकर कांग्रेस पहले से ही केंद्र सरकार पर हमलावर है, और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

क्या है एथेनॉल-चीनी विवाद?

केंद्र सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने की नीति (E20) लागू कर रही है, ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाई जा सके। इस नीति के तहत गन्ने के रस और शीरे का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है।

कांग्रेस का आरोप है कि इसी वजह से चीनी उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाला गन्ना कम पड़ रहा है, जिससे बाजार में चीनी की उपलब्धता घटी है और दाम बढ़े हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • गन्ने और अनाज का बड़ा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट किए जाने का आरोप
  • चीनी के साथ-साथ गुड़ की कीमतों में भी बढ़ोतरी की बात सामने आई है
  • चावल, मक्का आटा और पशु आहार जैसी वस्तुओं पर भी असर की बात कही जा रही है

छत्तीसगढ़ में दाल की महंगाई पर भी सवाल

दीपक बैज ने रायपुर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ चीनी तक बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने कहा कि अब दाल की कीमतों में भी लगातार तेजी देखी जा रही है, जिससे आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ रहा है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों का सामूहिक असर है कि जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं, जबकि आम आदमी की आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही।

राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस लगातार मुखर

छत्तीसगढ़ में हुए इस बयान से पहले, केंद्रीय स्तर पर भी कांग्रेस इसी मुद्दे को जोर-शोर से उठा चुकी है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने हाल ही में सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि एथेनॉल उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में गन्ना डायवर्ट किए जाने से पिछले कुछ महीनों में चीनी और गुड़ के दाम काफी बढ़ गए हैं। उनके अनुसार अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन का असर चावल, मक्का आटा और पशु आहार की कीमतों पर भी पड़ा है।

कांग्रेस कार्यसमिति और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से भी यह मुद्दा पहले उठाया जा चुका है, जिसमें एथेनॉल मिश्रण नीति की समीक्षा और उपभोक्ताओं को बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल विकल्प देने की मांग की गई थी।

दूसरी ओर, पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि वाहनों का माइलेज केवल ईंधन पर नहीं, बल्कि ड्राइविंग आदत, ट्रैफिक और वाहन के रखरखाव जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है, और E20 ईंधन का व्यापक परीक्षण किया जा चुका है।

किस पर पड़ रहा है असर?

  • आम उपभोक्ता: रसोई का बजट बढ़ रहा है, चीनी और दाल जैसी रोजमर्रा की चीजें महंगी हो रही हैं
  • छोटे कारोबारी: मिठाई व्यवसायी और चाय दुकानदारों की लागत बढ़ने की बात सामने आ रही है
  • किसान: गन्ना और अनाज की मांग एथेनॉल उद्योग की ओर बढ़ने से बाजार समीकरण बदल रहे हैं

आगे क्या होगा?

एथेनॉल नीति को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी टकराव आगे भी जारी रहने के आसार हैं। विपक्ष जहां नीति की समीक्षा की मांग कर रहा है, वहीं सरकार की ओर से अब तक इस पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कीमतों में आगे बढ़ोतरी होती है या राहत मिलती है, यह आने वाले हफ्तों में साफ हो पाएगा।

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