कीचड़ में कंधों पर निकली अंतिम यात्रा, सड़क के अभाव ने खोली विकास की पोल,देखिए विडिओ

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सक्ती। जिले के ग्राम पंचायत सांठी से एक बेहद मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। गांव की करीब 60 वर्षीय कमलबाई महंत के निधन के बाद परिजनों और ग्रामीणों को उनकी अर्थी लगभग एक किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर कीचड़ और दलदल से भरे रास्ते से ले जाना पड़ा। अंतिम संस्कार के लिए उन्हें बोराई नदी भी पैदल पार करनी पड़ी।

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान गांव से श्मशान तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। इसका असर केवल अंतिम यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूली बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और किसानों को भी रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण की मांग कई बार प्रशासन के सामने रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। वहीं ग्राम पंचायत का कहना है कि रेलवे फाटक से बोराई नदी तक सड़क निर्माण का प्रस्ताव मनरेगा के तहत जनपद पंचायत को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किए जाने की बात कही गई है।

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