दो दोस्तों ने देहदान का लिया निर्णय ,मिट्टी में मिल जाने से अच्छा किसी के काम आ जाए मृत देह

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मिट्टी में मिल जाने से अच्छा किसी के काम आ जाए मृत देह

हमारे देश में ऋषि दधीचि के चरण चिन्हों पर चलने वालों की कमी नहीं है। तभी तो कोरबा के दो दोस्तों ने एक साथ निर्णय लिया कि उन्हें अपने देह दान की घोषणा कर देनी चाहिए ताकि मौत के बाद उनका शरीर मिट्टी में मिलने की बजाय लोगों के काम आ जाए विवारू राम नोनिया और बुद्धू दास महंत कोरबा बालकों के कैलाश नगर वह बेला कछार में निवास करते हैं। दोनों पिछले एक दशक से एक साथ मॉर्निंग वॉक पर निकलते हैं दोनों ने निर्णय लिया कि अब उनकी उम्र बढ़ रही है मौत कभी भी उन्हें अपने आगोश में ले सकती है इसलिए दोनों ने देहदान की घोषणा कर दी। विवारु राम ने बताया कि 2011 में बालको से सेवानिवृत हुए.उनके दो लड़के और तीन लड़कियां है सबने उनकी भावना का स्वागत किया है। वह कहते हैं कि मिट्टी का शरीर है मिट्टी में मिल जाएगा मरने के बाद भी अगर यह शरीर किसी के काम आए तो सौभाग्य की बात है विवाऊ राम ने बताया की कोरबा में देहदान के प्रति बने वातावरण और अपने गुरु रामपाल से प्रेरणा लेकर उन्होंने यह निर्णय लिया है

बुजुर्गों की इस जोड़ी के दूसरे सदस्य बुद्धू दास महंत तीन लड़कों व एक लड़की के पिता है उन्होंने जीवन भर मजदूरी की अब वह भी चाहते हैं की मरणोपरांत उनका शरीर अथवा उसका कोई अंग किसी के काम आ जाए

विवाऊ राम नोनिया और बुद्धू दासमहंत द्वारा लिए गए संकल्प कि उनके शुभचिंतकों और परिचितों में खूब चर्चा है सभी उनके इस संकल्प का स्वागत कर रहे हैं. कहां जा रहा है कि सबके मन में इस तरह का भाव यदि जन्म ले और उसे पर लोग अमल करें तो दुनिया और खूबसूरत हो जाएगी

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