जांजगीर-चांपा: जिले के अफरीद मुड़पार क्षेत्र में शनिवार तड़के वन विभाग की टीम ने एक बड़ी और ताबड़तोड़ अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को अंजाम दिया। सुबह करीब 4 बजे, जब लोग सो रहे थे, डीएफओ (DFO) के नेतृत्व में वन विभाग की टीम, पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गई। भारी संख्या में तैनात फॉरेस्ट गार्ड्स की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों ने वन भूमि पर बने तीन मकानों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया।जनप्रतिनिधियों का दखल और कलेक्टर का आदेशकार्रवाई की भनक लगते ही जिला पंचायत उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि तुरंत मौके पर पहुंचे।

उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। मामला बढ़ता देख जनप्रतिनिधियों ने सीधे कलेक्टर से संपर्क कर कार्रवाई रोकने का आग्रह किया। कलेक्टर के निर्देश पर चांपा एसडीएम तत्काल मौके पर पहुंचे और वन विभाग की इस बेदखली कार्रवाई पर रोक लगा दी। प्रशासन ने फिलहाल 15 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर मकान खाली करने का आदेश दिया है।बारिश के मौसम में आशियाना छिनने का डर, PMAY योजना पर सवालअचानक हुई इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों के सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वन विभाग ने नोटिस जरूर दिया था, लेकिन भाजपा नेताओं और जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बारिश के मौसम तक कोई कार्रवाई नहीं होगी। अब इस तरह अचानक घर तोड़े जाने से महिलाएं और बच्चे सहमे हुए हैं।इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ा पेंच यह फंसा है कि जिन 18 घरों को वन विभाग ने अतिक्रमणकारी मानकर बेदखली का नोटिस थमाया है, उनमें से 7 मकान सरकारी योजना यानी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने हुए हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि अगर जमीन वन विभाग की थी, तो सरकारी योजना के तहत मकान बनाने की मंजूरी और फंड कैसे जारी हुआ? पीड़ित लोग अब जमीन खाली करने से पहले सरकार से वैकल्पिक रहने की व्यवस्था (पुनर्वास) की मांग कर रहे हैं।















