कोरबा अपीलीय न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला, चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि कायम

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कोरबा, 11जुलाई। माननीय डॉ. ममता भोजवानी, द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, कोरबा ने दाण्डिक अपील क्रमांक 59/2026, निक्की विधवानी बनाम पंजाब नेशनल बैंक में महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए अभियुक्त निक्की विधवानी द्वारा प्रस्तुत अपील को निरस्त कर दिया तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा द्वारा पारित दोषसिद्धि एवं दण्डादेश की पुष्टि की है।

प्रकरण के अनुसार, अभियुक्त निक्की विधवानी ने पंजाब नेशनल बैंक, निहारिका शाखा, कोरबा से ₹4,25,000/- का ऋण प्राप्त किया था। ऋण खाते में ₹3,45,995.88 की बकाया राशि के भुगतान हेतु अभियुक्त द्वारा जारी चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर “निधि अपर्याप्त (Funds Insufficient)” के कारण अनादरित हो गया। विधिक नोटिस दिए जाने के बावजूद भुगतान नहीं किए जाने पर बैंक द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत परिवाद प्रस्तुत किया गया।

मामले में पंजाब नेशनल बैंक की ओर से अधिवक्ता श्री धनेश कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी करते हुए यह प्रतिपादित किया कि अभियुक्त द्वारा जारी चेक विधिक देनदारी के निर्वहन हेतु दिया गया था तथा चेक अनादरण और विधिक नोटिस से संबंधित सभी वैधानिक औपचारिकताएँ विधिवत पूर्ण की गई हैं।

माननीय डॉ. ममता भोजवानी, द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, कोरबा ने अपने निर्णय में कहा कि अभियुक्त चेक से संबंधित विधिक उपधारणा का खंडन करने में असफल रही तथा अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों से यह सिद्ध होता है कि चेक विधिक देनदारी के निर्वहन हेतु जारी किया गया था। फलस्वरूप, विचारण न्यायालय द्वारा धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत पारित एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹3,50,000/- के अर्थदण्ड की सजा को यथावत रखते हुए अपील निरस्त कर दी गई।

उक्त निर्णय को चेक बाउंस मामलों में वित्तीय अनुशासन तथा परक्राम्य लिखतों की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।

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