प्रधानमंत्री के मन की बात में गूंजा कोरबा का जल संरक्षण मॉडल, कैच द रेन अभियान में जिले के नवाचारों की पीएम ने की सराहना,देखिए विडिओ

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कोरबा। जल संरक्षण के क्षेत्र में कोरबा जिले के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 136वें एपिसोड में कैच द रेन अभियान के अंतर्गत कोरबा जिले में किए जा रहे वर्षा जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्यों का उल्लेख करते हुए इसे देश के लिए प्रेरणादायी पहल बताया। प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा मॉडल की सराहना जिले के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन तथा समस्त जिलेवासियों के लिए गौरव और सम्मान का विषय है।नगर निगम आयुक्त श्री आशुतोष पाण्डेय ने इस विषय पर जानकारी प्रदान की आप सभी सुनिए-

कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन के नेतृत्व में जिले में जल संरक्षण संवर्धन एवं मृदा संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से व्यापक व नवाचारी कार्य किए जा रहे हैं। कैच द रेन अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत वर्षा जल के अधिकतम संचयन, भूजल स्तर में वृद्धि तथा जल संसाधनों के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में अनेक स्थायी संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। जिले की सभी ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी के माध्यम से वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केन्द्र, विद्यालय, सामुदायिक भवन एवं अन्य सार्वजनिक भवनों में रूफटॉप रेन  वाटर हार्वेस्टिंग तथा रिचार्ज पिट का निर्माण अनिवार्य रूप से कराया जा रहा है, ताकि प्रत्येक शासकीय भवन जल संरक्षण का मॉडल बन सके। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मन की बात में कोरबा के जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर दूरदृष्टि, नवाचार और जनभागीदारी के साथ किए गए प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणा बन सकते हैं। कोरबा का यह मॉडल आज देश के अन्य जिलों के लिए भी जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभर रहा है।

10 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य

वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में 10 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिनमें से 8,500 से अधिक संरचनाएं पूर्ण हो चुकी हैं तथा शेष कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। इन संरचनाओं में बोरवेल रिचार्ज, चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज, गेबियन संरचना, गली प्लग, नाला बंधान, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग, सोखता गड्ढा, सब-सर्फेस डाइक, आजीविका डबरी, नवा तरिया, तालाब गहरीकरण सहित अनेक जल संरक्षण संरचनाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भूजल स्तर में वृद्धि तथा मिट्टी के कटाव को रोकना है।

ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती  

इसी क्रम में जिले में संचालित मोर गांव-मोर  पानी महाअभियान के तहत 711 आजीविका डबरी, 62 नवा तरिया, 625 डगवेल , 39 तालाब गहरीकरण, 12 परकोलेशन टैंक, 166 सोक पीट , 12 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग, 82000 साजा अर्जुन पौधों का नर्सरी सह वृक्षारोपण तथा अन्य जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों से जल संरक्षण के साथ-साथ सिंचाई, मत्स्य पालन, पशुपालन तथा ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिल रही है।

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