बारिश, कीचड़ और टूटा पुल… फिर भी नहीं रुके कलेक्टर के कदम,देखिए विडिओ

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कोरबा, 06 अगस्त 2026।बारिश के दिनों में उफनते नदी-नाले जब रास्तों को रोक देते हैं, तब गांवों के लिए पुल महज कंक्रीट की संरचना नहीं, बल्कि जिंदगी की सबसे जरूरी कड़ी बन जाते हैं। बच्चों की पढ़ाई से लेकर मरीजों के अस्पताल पहुंचने और किसानों की उपज बाजार तक जाने तक, ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी इन्हीं रास्तों पर टिकी होती है। ऐसे में पुल टूटता है तो सिर्फ रास्ता नहीं टूटता, बल्कि गांवों की रफ्तार भी थम जाती है।

इसी पीड़ा और संवेदनशीलता को समझते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत गुरुवार को जिला मुख्यालय से करीब 90-100 किलोमीटर दूर पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के सुदूर गांव पनगंवा, सुखरीताल, हरदेवा और सरमा पहुंचे। लगातार बारिश और तेज बहाव से क्षतिग्रस्त पुल-पुलियाओं का उन्होंने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और ग्रामीणों से उनकी परेशानियां जानीं।

जब गाड़ी ने जवाब दिया, कलेक्टर ने पैदल ही पकड़ लिया रास्ता

दुर्गम इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं था। बारिश से रास्ते कीचड़ में तब्दील थे, जगह-जगह फिसलन थी और नदी-नालों का बहाव तेज था। कई जगह वाहन आगे नहीं बढ़ सके। लेकिन ग्रामीणों की समस्या को करीब से देखने की प्राथमिकता के सामने मुश्किलें छोटी पड़ गईं।

कलेक्टर ने अपनी कार रास्ते में ही छोड़ दी और कीचड़ भरे रास्ते पर पैदल चलकर निरीक्षण स्थल तक पहुंचे। उनके साथ अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी कठिन रास्ता तय किया।

यह दौरा केवल क्षतिग्रस्त पुलों का जायजा लेने तक सीमित नहीं रहा। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि आज की अस्थायी मरम्मत के साथ-साथ भविष्य में बनने वाले पुल-पुलियाओं की मजबूती और टिकाऊपन पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।

सुखरीताल-हरदेवा में टूटा पुल, अब बनेगा मजबूत विकल्प

ग्राम सुखरीताल और हरदेवा के बीच नाले में तेज बहाव से क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों एवं अभियंताओं से निर्माण की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि बारिश समाप्त होने के बाद पुल का निर्माण वैज्ञानिक डिजाइन, पर्याप्त जल निकासी क्षमता और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाए, ताकि भविष्य में तेज बारिश और बाढ़ के दौरान फिर ऐसी स्थिति न बने।

पनगंवा में बकई नदी का पुल भी क्षतिग्रस्त

ग्राम पनगंवा में बकई नदी पर क्षतिग्रस्त पुल का भी कलेक्टर ने निरीक्षण किया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पनगंवा-सरमा मार्ग पर आवागमन की स्थिति देखने के बाद उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा की।

ग्रामीणों ने बताया कि पुल का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। इस पर कलेक्टर ने पीएमजीएसवाय के कार्यपालन अभियंता सी.एस. तंवर को बाढ़ आपदा राहत मद से प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

कहीं तत्काल राहत, तो कहीं स्थायी समाधान के निर्देश

कलेक्टर ने सरमा तथा हरदेवा-सुखरीताल के बीच क्षतिग्रस्त पुलियाओं का भी निरीक्षण किया। सरमा में लोक निर्माण विभाग की पुलिया पर तत्काल मिट्टी भरकर आवागमन शुरू कराने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीणों को तत्काल राहत मिल सके।

वहीं सुखरीताल में बारिश समाप्त होते ही नई और पहले से अधिक मजबूत पुलिया के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश पीएमजीएसवाय के अधिकारियों को दिए।

कलेक्टर का साफ संदेश—पुल सिर्फ बने नहीं, टिके भी

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर कुणाल दुदावत का संदेश स्पष्ट रहा—सिर्फ क्षतिग्रस्त पुलों की मरम्मत पर्याप्त नहीं है। ऐसे स्थायी और गुणवत्तापूर्ण निर्माण की जरूरत है, जो आने वाले वर्षों में भी तेज बारिश और बाढ़ का सामना कर सके और ग्रामीणों का आवागमन सुरक्षित एवं निर्बाध बनाए रखे

दुर्गम रास्तों में पैदल चलकर ग्रामीणों की समस्या को करीब से देखना और मौके पर ही अधिकारियों को समाधान के निर्देश देना प्रशासन की उस सोच को सामने लाता है, जिसमें तत्काल राहत के साथ भविष्य की मजबूती को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

कलेक्टर ने ग्रामीणों से अपील की कि भारी बारिश के दौरान जब नदी-नाले उफान पर हों, तब जान जोखिम में डालकर उन्हें पार न करें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।

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