कोरबा में मेडिकल स्टोर पर गंभीर आरोप: हार्ट पेशेंट को गलत दवा देने से शुगर गिरने का दावा, परिवार ने की कार्रवाई की मांग

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कोरबा। शहर के निहारिका क्षेत्र स्थित गरिमा मेडिको पर एक गंभीर मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उनकी बहन, जो हाल ही में ओपन हार्ट सर्जरी से गुजरी हैं, को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा के स्थान पर दूसरी दवा दे दी गई। परिवार का दावा है कि दवा लेने के बाद मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ गई और ब्लड शुगर काफी नीचे चली गई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, मरीज सीमा अग्रवाल बिलासपुर में ओपन हार्ट सर्जरी के बाद कोरबा के चिकित्सक डॉ. संजय पाण्डेय के उपचार में हैं। 24 जून 2026 को डॉक्टर की पर्ची में Reclide XR-30, 60mg लिखी गई थी। परिवार का आरोप है कि 14 जुलाई 2026 को निहारिका स्थित गरिमा मेडिको से दवा खरीदते समय उन्हें Reclide के स्थान पर Reclimet XR-30, 60+500mg दे दी गई। इसके लिए ₹1,767 का बिल भी जारी किया गया।

परिवार का आरोप है कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा और मेडिकल स्टोर से मिली दवा के साल्ट में अंतर था। गलत दवा का पहला डोज लेने के बाद मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी और ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक गिरने की स्थिति बनी। इसके बाद परिजन मरीज को चिकित्सक के पास लेकर पहुंचे और वहां दवा दिखाई गई।

शिकायतकर्ता का दावा है कि चिकित्सक ने दवा की जांच करने के बाद बताया कि पर्चे में वही दवा नहीं लिखी गई थी, जो मेडिकल स्टोर से दी गई थी। हालांकि, इस पूरे मामले में दवा से मरीज की तबीयत बिगड़ने की चिकित्सकीय पुष्टि और जिम्मेदारी तय होना संबंधित जांच का विषय है।

मेडिकल स्टोर संचालक पर लगाया लापरवाही का आरोप

परिजनों का आरोप है कि जब वे दवा और डॉक्टर की पर्ची लेकर मेडिकल स्टोर पहुंचे और संचालक से जवाब मांगा, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। परिवार ने इस मामले में मेडिकल स्टोर संचालक जयंत अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस और औषधि विभाग से शिकायत

मामले को लेकर थाना सिविल लाइन रामपुर में लिखित शिकायत दिए जाने की बात सामने आई है। शिकायत की प्रतियां पुलिस अधीक्षक, कोरबा और जिला औषधि निरीक्षक को भी सौंपे जाने का दावा किया गया है।

अब परिवार की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि जांच में मेडिकल स्टोर की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

जांच के बाद साफ होगी जिम्मेदारी

यह मामला फिलहाल शिकायत और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मेडिकल स्टोर संचालक का पक्ष तथा पुलिस और औषधि विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज को गलत दवा किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में दी गई तथा इसके लिए कानूनी रूप से कौन जिम्मेदार है।

 दवा खरीदते समय मरीज और परिजन डॉक्टर की पर्ची, दवा का नाम, स्ट्रेंथ और बिल को ध्यान से जांचें। किसी भी तरह का संदेह होने पर दवा लेने से पहले चिकित्सक या योग्य फार्मासिस्ट से पुष्टि जरूर करें।

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