कोरबा से बड़ी खबर: महापौर ने पत्रकार मनीष जायसवाल को मंच से हटाया, वीडियो बनाने से भी रोका – पत्रकार समाज आक्रोशित,देखिए विडिओ

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📍JB News Korba | रिपोर्ट: मनीष जायसवाल

कोरबा, 23 जुलाई:
सीतामढ़ी में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का घोर अपमान हुआ। चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष योगेश जैन द्वारा विशेष रूप से आमंत्रित किए गए JB News कोरबा के पत्रकार मनीष जायसवाल के साथ सार्वजनिक रूप से बदसलूकी की गई।

🎥 वीडियो मत बनाओ – महापौर की सार्वजनिक चेतावनी:

कार्यक्रम के दौरान जब मनीष जायसवाल अपनी पत्रकारिता जिम्मेदारी के तहत वीडियो कवरेज कर रहे थे, तभी मंच पर मौजूद महापौर ने सरेआम उन्हें रोकते हुए कहा –
“वीडियो मत बनाओ, यहां लवेरा कहीं भी चालू हो जाता है!”
इस टिप्पणी को न केवल तंज के रूप में लिया गया, बल्कि यह एक पत्रकार की आज़ादी पर हमला माना जा रहा है।

❗ मंच से हटाया, अपमानित किया गया:

महापौर ने यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने यह तक कह दिया –
“मैंने आपको नहीं बुलाया, आपको मंच पर आने का अधिकार नहीं है।”
जबकि कार्यक्रम आयोजक स्वयं पत्रकार मनीष जायसवाल को आमंत्रित कर चुके थे।


🗣️ पत्रकार मनीष जायसवाल का बयान:

“यह केवल मेरा नहीं, पूरे पत्रकार समाज का अपमान है। सार्वजनिक तौर पर मेरा अपमान करके महापौर ने अपने पद की मर्यादा गिराई है। उन्होंने मुझे मंच से हटाया, वीडियो बनाने से रोका और तंज कसकर मेरी गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।”


🔥 पत्रकार समाज में आक्रोश:

इस अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ कोरबा के पत्रकार संगठनों में भारी नाराजगी है। पत्रकारों का कहना है कि यदि उन्हें उनकी रिपोर्टिंग से रोका जाएगा, और आमंत्रण के बावजूद मंच से हटाया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का घोर उल्लंघन है।

📣 बड़े सवाल खड़े होते हैं:

क्या एक महापौर को यह अधिकार है कि वह आमंत्रित पत्रकार को मंच से हटाए?

क्या पत्रकारों को धमकाना और उन्हें वीडियो न बनाने देना लोकतंत्र का अपमान नहीं?

क्या जनप्रतिनिधियों की यह भाषा शोभा देती है?


🛑 JB News कोरबा की मांग:

JB News कोरबा इस घटनाक्रम की निंदा करता है और महापौर से सार्वजनिक क्षमा याचना की मांग करता है। साथ ही, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अनुरोध करता है कि वे पत्रकारों की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करें।


यह घटना लोकतंत्र, पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक गहरा हमला है – जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

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