मुख्य सचिव विदेश में, चार्ज भी नहीं सौंपा छत्तीसगढ़ का प्रशासन ऑटोपायलट पर!

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रायपुर : – छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था इन दिनों अनोखी स्थिति से गुजर रही है। राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन पिछले चार दिनों से विदेश यात्रा पर हैं। लेकिन उन्होंने जाते समय न तो किसी को चार्ज सौंपा और न ही उनकी अनुपस्थिति में कोई कार्यपालक मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। यह पहला अवसर है जब प्रदेश प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी के बिना राज्य का संचालन हो रहा है। सवाल यह है कि अगर इस दौरान कोई आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो जिम्मेदारी किसकी होती?

प्रशासन का मुखिया गायब-
मुख्य सचिव को राज्य का प्रशासनिक मुखिया माना जाता है। सभी विभागों का समन्वय और नीति-निर्माण की प्रक्रिया उन्हीं के मार्गदर्शन में चलती है। किंतु मौजूदा हालात में यह पद बिना कप्तान का जहाज़ बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमूमन ऐसा होता नहीं है मुख्य सचिव की छुट्टी या विदेश यात्रा के दौरान कार्यभार किसी वरिष्ठ अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव को सौंपा जाता है।

पहले भी हुई है ऐसी स्थिति, तब क्या हुआ था-
इसके पहले भी वर्ष 2013 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्य सचिव पी.के. चौधरी छुट्टी पर गए थे। सरकार ने कार्यभार किसे सौंपना है, इस पर निर्णय नहीं लिया। नतीजतन सचिवालय में फाइलों पर हस्ताक्षर अटक गए। कई विभागों के आदेश रुके रहे और मंत्रियों तक को काम कराने में परेशानी हुई। प्रशासनिक स्तर पर इसे पॉलिसी पैरालिसिस कहा गया। वही एक बार दिल्ली के मुख्य सचिव छुट्टी पर गए और स्थानापन्न तय नहीं हुआ, तो विभागों के बीच समन्वय बिगड़ गया। फाइलें इधर-उधर भटकती रहीं और मंत्री स्तर पर लिए गए फैसले लागू कराने में देरी हुई। कई आपात बैठकों में कौन अधिकृत है यही सवाल उठता रहा। यह उदाहरण है जो बताते है कि बिना मुख्य सचिव के सरकार का कामकाज ठप न सही, लेकिन बेहद धीमा और असमंजस भरा हो जाता है।

जवाबदेही का सवाल –
सवाल यह उठता है कि अगर इस दौरान कोई कानून-व्यवस्था संबंधी संकट या प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थिति आती है तो निर्णय लेने की जिम्मेदारी किसकी होगी? मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग सैद्धांतिक रूप से संकट-प्रबंधन कर सकते हैं। लेकिन मुख्य सचिव की अनुपस्थिति में समन्वय और प्रशासनिक निर्णयों में भारी कमी रह सकती है। यही कारण है कि इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है।

राजनीतिक तंज और प्रशासनिक सच्चाई-
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश की यह स्थिति ऑटोपायलट मोड जैसी है जहाँ सरकार और अफसरशाही दोनों ही यह मानकर चल रहे हैं कि कुछ खास घटेगा नहीं। राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल गूंज रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ इतना सुरक्षित और व्यवस्थित है कि वह मुख्य सचिव के बिना भी आराम से चल सकता है? यह तंज प्रशासनिक लापरवाही पर सीधा वार है, क्योंकि सामान्य तौर पर ऐसा होना लगभग असंभव और अकल्पनीय माना जाता है।

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