कटघोरा नगर पालिका का गंदा पानी अहिरन नदी में, निचले गांवों में जल संकट गहराया; ग्राम डुड़गा में 117 साल पुराने तालाब का गहरीकरण ग्रामीणों ने शुरू कराया

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कटघोरा। कटघोरा क्षेत्र में जल प्रदूषण और जल संकट की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। अहिरन नदी के किनारे बसे ग्राम डुड़गा सहित कई गांवों के ग्रामीण इन दिनों भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पालिका कटघोरा का नाले के माध्यम से निकलने वाला गंदा और सीवर का पानी बिना किसी शोधन (ट्रीटमेंट) के सीधे अहिरन नदी में छोड़ा जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस लापरवाही के चलते नदी का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है। हालात ऐसे बन गए हैं कि निचले गांवों के लोग अब नदी के पानी का उपयोग करने से कतराने लगे हैं। पीने और दैनिक उपयोग के लिए स्वच्छ पानी नहीं मिलने से जल संकट और गहरा गया है, वहीं जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीण बताते हैं कि एक समय अहिरन नदी और गांव का लगभग 117 वर्ष पुराना तालाब पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा हुआ करता था।

एक तरफ ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों की सोच

इंसान से लेकर पशु-पक्षी और खेती-किसानी तक सभी इसी जल स्रोत पर निर्भर थे, लेकिन वर्तमान में नदी के प्रदूषित होने से स्थिति चिंताजनक हो गई है।

समस्या की गंभीरता को देखते हुए ग्राम डुड़गा के ग्रामीणों ने अब खुद पहल करते हुए पुराने तालाब के गहरीकरण का कार्य शुरू कर दिया है। जेसीबी मशीन की मदद से तालाब की खुदाई कर उसे गहरा किया जा रहा है, ताकि बारिश का पानी उसमें संग्रहित हो सके और सालभर गांव के लोगों व पशुओं को पानी मिल सके।

नगर पालिका परिषद कटघोरा दुर्गा मंदिर के पास का नाली निर्माण हो रहा है जो नाला से जोड़ने का तैयारी इसके माध्यम से अहिरन नदी में छोड़ा जाएगा पानी

ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर पालिका परिषद कटघोरा नगर से निकलने वाले गंदे पानी को बिना शोधन नदी में छोड़े जाने पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही अहिरन नदी को स्वच्छ बनाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
फिलहाल, प्रशासनिक पहल के इंतजार में ग्रामीण अपने स्तर पर जल संकट से निपटने के लिए तालाब को पुनर्जीवित करने में जुटे हुए हैं, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बेहद जरूरी है।

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