कोरबा। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) प्रबंधन द्वारा स्थानीय ठेकेदारों के लिए निविदा प्रक्रिया में लागू की गई 5 करोड़ एवं 10 करोड़ वार्षिक टर्नओवर की अनिवार्य पात्रता शर्तों को लेकर विवाद गहरा गया है। इस नई नीति के विरोध में ‘वेदांता कॉन्ट्रेक्टर एसोसिएशन’, बालको नगर के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी गंभीर समस्याओं से अवगत कराया।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि बालको में वर्षों से कार्यरत अनेक अनुभवी एवं सक्षम स्थानीय ठेकेदार वर्तमान में केवल इस उच्च वित्तीय टर्नओवर की शर्त के कारण निविदा प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय व्यवसायों को नुकसान होगा, बल्कि रोजगार और उनसे जुड़े हजारों स्थानीय श्रमिकों के हित भी बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका खड़ी हो गई है।
कलेक्टर को लिखा पत्र, हस्तक्षेप की मांग
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस विषय को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने तत्काल कोरबा कलेक्टर को पत्र लिखकर बालको प्रबंधन एवं स्थानीय ठेकेदारों के मध्य समन्वय स्थापित कर उचित समाधान निकालने हेतु आवश्यक हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
श्री अग्रवाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया, “कोरबा जिला प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है और बालको जैसी प्रतिष्ठित औद्योगिक इकाई के विकास एवं संचालन में स्थानीय ठेकेदारों, उद्यमियों एवं श्रमिकों का वर्षों से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन स्थानीय ठेकेदारों ने अपने अनुभव, तकनीकी दक्षता एवं संसाधनों के माध्यम से कंपनी के विभिन्न कार्यों को हमेशा सफलतापूर्वक पूरा किया है।”
औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय सहभागिता जरूरी
पूर्व मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि बड़ी औद्योगिक इकाइयों की जिम्मेदारी केवल उत्पादन और व्यवसाय तक सीमित नहीं होती। जिस क्षेत्र में वे स्थापित हैं, वहां के स्थानीय लोगों, उद्यमियों एवं श्रमिकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी उनका सामाजिक दायित्व (CSR) है। छोटे एवं मध्यम स्तर के स्थानीय ठेकेदारों के पास पर्याप्त अनुभव होने के बावजूद वित्तीय पात्रता के कड़े मानदंडों के कारण उन्हें अवसरों से बाहर करना न्यायसंगत नहीं है।
जनसुनवाई के आश्वासनों की याद दिलाई
श्री अग्रवाल ने बालको विस्तार परियोजना के समय आयोजित जनसुनवाई का स्मरण कराते हुए कहा कि तत्कालीन बालको सीईओ अभिजीत पती द्वारा स्थानीय बेरोजगारों, व्यवसायियों, ठेकेदारों और स्थानीय समुदाय के हितों को प्राथमिकता देने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में स्थानीय हितों की खुली उपेक्षा दिखाई दे रही है।
पूर्व मंत्री ने जिला प्रशासन से की ये प्रमुख मांगें:
- बालको प्रबंधन से चर्चा कर 5 करोड़ एवं 10 करोड़ वार्षिक टर्नओवर की अनिवार्य शर्तों की पुनः समीक्षा कराई जाए।
- जिला प्रशासन की उपस्थिति में बालको प्रबंधन एवं वेदांता कॉन्ट्रेक्टर एसोसिएशन के मध्य तत्काल एक समन्वय बैठक आयोजित की जाए।
- वर्षों से बालको में कार्यरत अनुभवी स्थानीय ठेकेदारों एवं उनसे जुड़े श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए व्यवहारिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने अंत में कहा कि कोरबा की औद्योगिक पहचान यहां के उद्योगों और स्थानीय लोगों के आपसी सहयोग से बनी है। स्थानीय उद्यमियों एवं श्रमिकों के हितों का संरक्षण क्षेत्र के संतुलित, समावेशी एवं सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।















