कोरबा की पहचान बने ‘रानी धनराज कुंवर महोत्सव’, इतिहास, संस्कृति और विरासत को मिले नई उड़ान,मो.रफीक मेमन

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक चक्रधर समारोह और कोरबा के पाली महोत्सव की तर्ज पर अब कोरबा में भी “रानी धनराज कुंवर महोत्सव” आयोजित किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। शहर के इतिहासकारों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और नागरिकों का मानना है कि जिस रानी धनराज कुंवर ने कोरबा की पहचान, विकास और सामाजिक व्यवस्था को नई दिशा दी, उनके सम्मान में हर वर्ष भव्य महोत्सव आयोजित किया जाना चाहिए।


मो.रफीक मेमन जी का कहना है कि रानी धनराज कुंवर का नाम कोरबा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने केवल तत्कालीन रियासत के विकास में ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज भी कोरबा में उनकी विरासत अनेक रूपों में जीवित है।तो रानी धनराज कुंवर जी की स्मृति में भी महोत्सव आयोजित करना चाहिए।


रानी धनराज कुंवर की स्मृति में बना रानी धनराज कुंवर जिला चिकित्सालय (अस्पताल) हजारों लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक रानी महल आज भी कोरबा के गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करता है। इसी परिसर में वर्तमान में कमला नेहरू महाविद्यालय संचालित है, जो शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। वहीं रानी धनराज कुंवर महाविद्यालय भी उनके नाम को आज तक जीवंत बनाए हुए है।
इतिहासकारों का कहना है कि रानी धनराज कुंवर के संरक्षण में अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला। कोरबा की ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों और सांस्कृतिक परंपराओं को संजोने में उनका योगदान अविस्मरणीय माना जाता है।


यदि प्रतिवर्ष रानी धनराज कुंवर महोत्सव आयोजित किया जाता है तो इससे कोरबा के इतिहास और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। महोत्सव में लोकनृत्य, लोकसंगीत, आदिवासी संस्कृति, ऐतिहासिक प्रदर्शनी, पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प, साहित्यिक गोष्ठियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। इससे जिले के कलाकारों, युवाओं और स्थानीय व्यापारियों को भी नया मंच मिलेगा।
इतना ही नहीं, रानी महल, रानी धनराज कुंवर अस्पताल, कमला नेहरू महाविद्यालय, रानी धनराज कुंवर महाविद्यालय तथा अन्य ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर हेरिटेज टूरिज्म सर्किट विकसित किया जा सकता है। इससे प्रदेश और देशभर से पर्यटक कोरबा आएंगे, स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और शहर की ऐतिहासिक पहचान को नई ऊंचाई मिलेगी।


कोरबा आज भले ही देश की ऊर्जाधानी के रूप में प्रसिद्ध हो, लेकिन उसकी असली पहचान उसके समृद्ध इतिहास, संस्कृति और विरासत में भी छिपी हुई है। नागरिकों का मानना है कि जिस प्रकार रायगढ़ का चक्रधर समारोह पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है, उसी तरह “रानी धनराज कुंवर महोत्सव” भी कोरबा की सांस्कृतिक पहचान बन सकता है।
यह केवल एक महोत्सव नहीं होगा, बल्कि कोरबा के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और रानी धनराज कुंवर के अतुलनीय योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक ऐतिहासिक अभियान साबित होगा।

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