कोरबा।जिले में राखड़ परिवहन और डंपिंग को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने पूरे मामले को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि HEMS Corporation की एक गाड़ी दर्री क्षेत्र से राखड़ लेकर बिंझरा की ओर जाने के बजाय रिसदा स्थित राखड़ डैम में राख डंप करती नजर आ रही है।
वीडियो सामने आने के बाद राख परिवहन की पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में लंबे समय से राख के परिवहन और उसके निपटान को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से यह सिलसिला लगातार जारी है।
स्थानीय स्तर पर लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि अब पुरानी कहावत “कहीं का ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा” की जगह मानो नया मुहावरा बन गया है, जहां दर्री की राख, दूसरी जगह की योजना और बीच में मोटी कमाई का खेल चल रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वीडियो में दिखाई गई गतिविधि सही है तो दर्री से निकली राख रिसदा राखड़ डैम तक कैसे पहुंची? क्या इसके लिए सक्षम अनुमति ली गई थी? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी? और यदि नहीं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
पर्यावरण से जुड़े जानकारों का कहना है कि राख का परिवहन और डंपिंग निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए। नियमों की अनदेखी न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती है।
ईई की मेहरबानी से चल रहा राख से रकम बनाने का खेल?
राख परिवहन और डंपिंग को लेकर अब संबंधित कार्यपालन अभियंता (ईई) की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कथित संरक्षण के कारण कुछ वाहनों को खुली छूट मिल रही है, जिससे नियमों की अनदेखी कर राख परिवहन और डंपिंग का कारोबार बेखौफ जारी है।
लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो राख परिवहन, डंपिंग और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन की कई परतें खुल सकती हैं। अब निगाहें जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण मंडल और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हैं।















