राष्ट्रपति को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने लिखा पत्र।….राज्य में वन अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन।…..50 हजार से अधिक आदिवासी और वन निवासी परिवारों को उनके कानूनी हक से किया जा रहा वंचित।

Must Read

राज्य के 1.58 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र पर आदिवासियों के बजाय ठेकेदारों का कब्जा, मछली नीति वन अधिकार कानून के विपरीत।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राष्ट्रपति जी का पत्र के संज्ञान पर जताया आभार।

रायपुर, 30 मई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य में अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी परिवारों के अधिकारों के हनन पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

डॉ. महंत ने देश की राष्ट्रपति महोदया को एक अर्धशासकीय पत्र (पत्र क्र. 341/ने.प्र./26) भेजकर छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को सख्ती से लागू कराने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

राष्ट्रपति को सौंपे गए पत्र में डॉ. चरणदास महंत ने उल्लेख किया है कि, अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 पूरे भारत में दिसंबर 2007 से प्रभावी है। इस कानून की धारा 3(1)(घ) के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, वन भूमि पर स्थित जलक्षेत्रों में मछली पालन और जलाशयों के अन्य उत्पादों के उपयोग का हकदारी या सामुदायिक अधिकार पत्र स्थानीय पात्र व्यक्तियों को दिया जाना चाहिए। अत्यंत खेद का विषय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में बीते 18 वर्षों में भी इस महत्वपूर्ण प्रावधान का क्रियान्वयन नहीं किया जा सका है।

ठेका प्रथा से मजदूर बनने को मजबूर हुए मूल निवासी डॉ. महंत ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य की वन भूमि पर लगभग 1,58,000 हेक्टेयर का विशाल जलक्षेत्र स्थित है। इन जलक्षेत्रों में मछली पालन और मत्स्याखेट के जरिए 50,000 से अधिक अनुसूचित जनजाति और अन्य वन निवासी परिवार अपनी जीविका चलाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ शासन की वर्तमान मछली नीति वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के पूरी तरह विपरीत है। कानून का उल्लंघन करते हुए राज्य के इन जलक्षेत्रों को पट्टे पर और 1000 हेक्टेयर से बड़े जलाशयों को निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित करके ठेकेदारों को सौंप दिया जाता है। इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि जिन बड़े जलाशयों पर स्थानीय आदिवासियों और वन निवासियों का सामुदायिक अधिकार होना चाहिए था, वहां वे बाहरी ठेकेदारों के अधीन महज मजदूर के रूप में काम करने को मजबूर हैं।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राष्ट्रपति महोदया से सादर अनुरोध किया है कि, छत्तीसगढ़ के आदिवासियों और पारंपरिक वन निवासियों के आर्थिक एवं कानूनी हितों की रक्षा के लिए वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(घ) को तत्काल प्रभाव से क्रियान्वित कराया जाए। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति महोदया से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि हजारों परिवारों को उनका वास्तविक हक मिल सके।

डॉ. महंत ने विश्वास व्यक्त किया है कि देश के सर्वाेच्च कार्यालय से निर्देश प्राप्त होने के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्य सचिव इस विषय की गंभीरता को समझेंगे। इस त्वरित और सकारात्मक पहल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, राष्ट्रपति जी का यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और छत्तीसगढ़ की जनता के हितों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। और राज्य की जनता से जुड़े इस महत्वपूर्ण मसले पर बिना किसी विलंब के त्वरित और उचित कदम उठाएंगे।

- Advertisement -
Latest News

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज करेंगे ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 134वें संस्करण को संबोधित

कोरबा। देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi आज 31 मई, रविवार को अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’...

More Articles Like This