बिलासपुर,जांजगीर-चांपा। निजी मकानों में धार्मिक सभा एवं प्रार्थना आयोजन को लेकर दायर एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए पूर्व में पारित एकलपीठ के आदेश को फिलहाल अप्रभावी कर दिया है। इसके साथ ही वर्तमान स्थिति में किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति लेने की आवश्यकता बनी रहेगी।
जानकारी के अनुसार, ग्राम गोधना निवासी बद्री प्रसाद साहू द्वारा दायर रिट याचिका क्रमांक 1281/2026 में उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने 24 मार्च 2026 को पुलिस द्वारा जारी नोटिस एवं पंचायत से अनुमति लेने की अनिवार्यता संबंधी निर्देशों को निरस्त कर दिया था। इस आदेश में कहा गया था कि निजी मकानों में धार्मिक सभा के लिए लोगों को एकत्रित करने हेतु प्रशासनिक अनुमति आवश्यक नहीं होगी।
हालांकि, राज्य शासन ने उक्त आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में रिट अपील क्रमांक 507/2026 प्रस्तुत की। इस अपील पर 22 जून 2026 को हुई सुनवाई के दौरान माननीय खंडपीठ ने अंतरिम राहत देते हुए 24 मार्च 2026 के आदेश को अपील के अंतिम निराकरण तक अप्रभावी रखने का निर्देश दिया।
न्यायालय के इस अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल किसी भी भवन या स्थान पर धार्मिक प्रार्थना सभा अथवा धार्मिक आयोजन करने के लिए प्रशासनिक अनुमति लेना आवश्यक माना जाएगा। साथ ही पुलिस प्रशासन ऐसे आयोजनों के संबंध में नोटिस जारी कर सकता है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकेगी।
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि छत्तीसगढ़ सार्वजनिक धार्मिक भवन तथा स्थान विनियामक अधिनियम, 1984 के प्रावधानों के अनुसार किसी भी भवन या स्थान में धार्मिक प्रार्थना अथवा सभा आयोजित करने के लिए प्रशासन की अनुमति आवश्यक है।
मामले की अंतिम सुनवाई और निर्णय तक राज्य में धार्मिक आयोजनों को लेकर प्रशासनिक अनुमति संबंधी प्रावधान प्रभावी रहेंगे।















