कोरबा। South Eastern Coalfields Limited (SECL) की कुसमुंडा परियोजना में 70 लाख टन कोयला गायब होने के लगाए गए आरोपों पर कंपनी ने कड़ा जवाब दिया है। SECL प्रबंधन ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है।
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि कुसमुंडा खदान में लगभग 70 लाख टन कोयला, जिसकी कीमत करीब ₹2100 करोड़ बताई जा रही है, केवल कागजों में दर्ज है और वास्तविक रूप से मौजूद नहीं है। इस कथित मामले को “फैंटम कोल” (Phantom Coal) का नाम भी दिया गया था। यह आरोप दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर सामने आने की बात कही गई थी।
हालांकि SECL प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि प्रारंभिक स्तर पर की गई जांच और तकनीकी मूल्यांकन में इस तरह के दावे सही नहीं पाए गए हैं। कंपनी के अनुसार खदानों में कोयले के उत्पादन, भंडारण और परिवहन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है और हर स्तर पर निगरानी रखी जाती है।
SECL का कहना है कि बिना पूरी जानकारी के इस तरह की खबरें फैलाने से भ्रम की स्थिति बनती है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी तरह की अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसकी विधिवत जांच कराई जाती है।
इस पूरे मामले को लेकर अब उच्च स्तरीय जांच की मांग भी उठ सकती है, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।















