हर हाथ को हुनर, हर जरूरतमंद को काम, स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा और खेल से पर्यटन तक होगा विकास, नये कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कोरबा के कायाकल्प बतायी प्लानिंग

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कोरबा 2 जनवरी 2026। नये साल के आगाज के साथ ही कोरबा जिले को एक नई दिशा और नई ऊर्जा मिलने लगी है। नव पदस्थ कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कार्यभार संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका लक्ष्य सिर्फ प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि जिले के समग्र विकास का ठोस रोडमैप तैयार कर उसे जमीन पर उतारना है। उनकी कार्यशैली, सोच और प्राथमिकताओं ने संकेत दे दिए हैं कि कोरबा आने वाले समय में एक नई पहचान गढ़ने की ओर बढ़ रहा है।

औद्योगिक नगरी कोरबा को लेकर कलेक्टर दुदावत की सोच बेहद स्पष्ट और व्यावहारिक है। उनका मानना है कि “हर हाथ को हुनर और हर जरूरतमंद को काम” का सपना तभी साकार होगा, जब कौशल विकास योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंचें। इसी उद्देश्य से कौशल भारत अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े और वे अपने ही जिले में आत्मनिर्भर बन सकें।

कोरबा का औद्योगिक इतिहास स्वर्णिम रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खदानें, एनटीपीसी और सीएसईबी जैसे विशाल बिजली संयंत्र इस जिले को देश के ऊर्जा मानचित्र में अहम स्थान दिलाते हैं। बावजूद इसके, प्रदूषण, विस्थापन, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दे लंबे समय से यहां की चुनौतियां रहे हैं। इन्हीं जमीनी सच्चाइयों को समझते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्वास्थ्य और शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उनका जोर है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। आदिवासी बाहुल्य कोरबा जिले में पंडो और पहाड़ी कोरबा जैसे विशेष संरक्षित जनजातियों का निवास प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।

इस संदर्भ में कलेक्टर दुदावत का दृष्टिकोण संवेदनशील और समावेशी है। वे मानते हैं कि विकास तभी सार्थक है, जब वह आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अधिकारों के साथ आगे बढ़े। पर्यटन के क्षेत्र में भी कलेक्टर की दूरदर्शिता साफ नजर आती है। उनका कहना है कि कोरबा प्राकृतिक सौंदर्य, वनांचल और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध जिला है, जहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। जल्द ही इस दिशा में ठोस योजनाएं बनाकर उनका क्रियान्वयन किया जाएगा, जिससे न केवल जिले की पहचान बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

2017 बैच के IAS अधिकारी कुणाल दुदावत ने बेहद सादगी, लेकिन दृढ़ता के साथ कहा—“लोगों का साथ लेकर ही विकास संभव है।” यही वाक्य उनकी प्रशासनिक सोच का सार है। सहभागिता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ने का यह विजन कोरबा को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। निस्संदेह, कलेक्टर कुणाल दुदावत के नेतृत्व में कोरबा जिले से नई उम्मीदों, ठोस फैसलों और सकारात्मक बदलावों की मजबूत शुरुआत हो चुकी है। आने वाला समय बताएगा कि यह रोडमैप किस तरह कोरबा के भविष्य को संवारता है, लेकिन संकेत साफ हैं— कोरबा अब बदलाव की राह पर है।

सवाल- कोरबा के उद्योग और खदानों में लंबे समय से बाहरी बनाम स्थानीय की लड़ाई चली आ रही है, इससे कैसे निपटेंगे ?

कलेक्टर – देखिये कोरबा मानव संसाधन की धानि है, उद्योग और कल-कारखानों में हमेशा ही श्रमिकों की जरूरत होती है। इन क्षेत्रों में अक्सर स्किल्ड लेबर के नाम पर बाहरी लोगों की भर्ती की जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए आने वाले समय पर माइनिंग और माइनिंग ऑपरेशन के साथ ही उद्योगों की उपयोगिता के मुताबिक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जायेगा। इस प्रशिक्षण का पहला बेनिफिट ये होगा कि हर हाथ को हुनरमंद किया जायेगा। इसके साथ ही जब स्थानीय लोग माइनिंग और औद्योगिक क्षेत्रों में काम के लिए स्किल्ड होंगे तो उनकी भर्ती में आने वाली सारी अड़चने खत्म होगी। और अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकेगा। 

सवाल- हाल के दिनों में सरगुजा और रायगढ़ में कोयला खदान के विरोध में हिंसक झड़प देखी गयी। कोरबा में भी नौकरी और विस्थापन को लेकर भूविस्थापित आंदोलनरत है , इस बड़ी चुनौती के लिए क्या रणनीति है ?

कलेक्टर- देखिये कोरबा में एसईसीएल की मेगा प्रोजक्ट संचालित है। निश्चित ही देश की उर्जा के लिए कोयले का उत्पादन आवश्यक है। लेकिन ये विकास स्थानीय लोगों को साथ लेकर और सामंजस्य बनाकर बेहतर ढंग से किया जा सकता है। मैंने ज्वाइनिंग के साथ ही एसईसीएल में भूविस्थापितों के पेंडिंग मामलों की जानकारी ली है। आने वाले दिनों में बगैर किसी विवाद के जायज प्रभावितों को नियमानुसार विस्थापन और मुआवजा और नौकरी की जो प्रक्रिया है, उसे पूरी करायी जायेगी। इसके लिए विशेष रूप से एसईसीएल प्रबंधन और राजस्व विभाग को निर्देशित किया गया है। 

सवाल- आपने ज्वाइनिंग के दूसरे दिन ही मेडिकल कालेज अस्पताल का निरीक्षण किया था। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए क्या रणनीति है ?
कलेक्टर- जीं बिल्कुल मेडिकल कालेज अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। अभी भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए कई काम होने जरूरी है। मेडिकल कालेज अस्पताल में मरीजों की जांच के लिए और भी बेहतर मशीनरी की जरूरत है, ताकि जांच के लिए मरीजों को भटकना न पड़े। सीटी स्कैन की सुविधा नही है। इसकी खरीदी के लिए टेंडर प्रोसेस में है। जल्द ही सीटी स्कैन के साथ ही MRI की सुविधा शुरू करने की प्लानिंग है, ताकि मरीजों को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। ऑपरेशन थियेटर में बेहतर उपकरण और स्टाफ बढ़ाने निर्देश दिये गये है।
सवाल – कोरबा आदिवासी बाहुल्य जिला है, यहां संरक्षित जनजाति भी रहती है, उनके विकास और उत्थान के लिए क्या प्लानिंग हैं ?

कलेक्टर- जीं, बिल्कुल संरक्षित जनजातियों के उत्थान के लिए भारत सरकार के साथ ही राज्य सरकार भी महत्वाकांक्षी योजनाएं योजना चला रही है। इनके विकास और उत्थान के लिए सबसे पहले बुनियादी सुविधाओं पर फोकस कर शासन की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना पहला लक्ष्य रहेगा। इसके साथ ही शहरी के साथ ही वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, आश्रम-छात्रावास और स्वास्थ्य को पूरी तरह से सुदृढ़ बनाया जायेगा। ताकि ग्रामीण और शहरी परिवेश में ज्यादा अंतर न रह सके।

सवाल- शिक्षा और खेल के क्षेत्र में क्या संभावनाएं है ?

कलेक्टर- देखिये गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए संकल्पबद्ध है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को विद्यालयों में बेहरत शिक्षा व्यवस्था, पर्याप्त शिक्षकों की पदस्थापना के साथ ही स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्टर को बेहतर करने के साथ ही डिजिटल शिक्षा नीति का सफल प्रयोग करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही जिले में खेल के क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं है। शहर के बीच इंदिरा स्टेडियम है, इसमें फ्लडलाइट की सुविधा नहीं है। सबसे पहले शहर के बीच स्थित इस स्टेडियम में फ्लडलाइट की सुविधा बहाल करने की प्लानिंग है, ताकि रात के वक्त भी लोग यहां आकर खेलकूद का अभ्यास कर सके। इसके बाद जिले में एक सर्व सुविधायुक्त इंडोर स्टेडियम तैयार किया जा सकता है, जहां अधिक से अधिक खेलो का आयोजन एक ही स्टेडियम में संभव हो सके, इस दिशा में भी प्लानिंग की जा रही है। 

सवाल- पर्यटन के क्षेत्र में कोरबा के भविष्य को कैसे देखते है ?

कलेक्टर- देखिये कोरबा जिले की ये खासियत है कि यहां एक तरफ जहां बड़ी-बड़ी कोयला खदाने, पाॅवर प्लांट और संयंत्र संचालित है। वहीं दूसरी तरफ घने जंगल और जंगलों के बीच बेहतर पर्यटन के केंद्र है। बांगो के बैक वाटर से बना सतरेंगा, बूका और टिहरी सरई में वाटर एडवेंचर की दिशा में काम करके कोरबा को एक अलग पहचान दी जा सकती है। इन पर्यटन स्थलों में वाटर स्पोर्टस, वाटर काॅटेज की बेहतर संभावनाएं है। इसे लेकर जल्द ही प्रस्ताव बनाकर क्रियान्वयन किया जायेगा। जिससे पर्यटन के क्षेत्र में कोरबा की पहचान न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश मेें भी हो सके।

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