कोरबा, 04 जून 2026/ जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से संचालित मोर गांव, मोर तरिया एवं मोर गांव मोर पानी अभियान ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधन संवर्धन का मजबूत आधार बनकर उभर रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से जहां जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं हजारों ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दिनेश कुमार नाग के मार्गदर्शन में जिलेभर में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। मानसून पूर्व जल संरचनाओं के निर्माण, मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्यों को तेज गति से संचालित किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित किया जा सके।
अभियान के अंतर्गत नवा तरिया निर्माण, कृषि तालाब, आजीविका डबरी, परकोलेशन टैंक, मेड़बंधान, नाला उपचार, जल निकासी संरचनाओं का विकास तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संबंधी कार्य व्यापक स्तर पर किए जा रहे हैं। इन कार्यों का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल स्तर में वृद्धि करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
वर्तमान में जिले में जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े 1500 से अधिक कार्य प्रगति पर हैं। इन कार्यों के माध्यम से प्रतिदिन 25 हजार से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्रामीणों को अपने ही गांव में रोजगार मिलने से पलायन की समस्या पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

जल आवश्यकताओं की होगी पूर्ति
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत संचालित यह अभियान आजीविका सुरक्षा के साथ-साथ जल सुरक्षा का भी प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। प्रशासन का प्रयास है कि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो तथा जल संरक्षण के माध्यम से भविष्य की जल आवश्यकताओं को सुरक्षित किया जा सके।

जिले में जल संरक्षण के लिए पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार की तकनीकों का समन्वित उपयोग किया जा रहा है। पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण हेतु तालाबों का गहरीकरण, नवा तरिया और डबरी निर्माण किए जा रहे हैं। वहीं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए नाला उपचार, स्टॉप डेम, परकोलेशन टैंक तथा मेड़बंधान जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन और जल निकासी संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।















