🌄 रविवार स्पेशल: पुटका पहाड़ की जबरदस्त कहानी — खनन से वीरान पहाड़ बना प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम!  JB NEWS KORBA | छत्तीसगढ़ 🟩🟨🟥देखिए विडिओ

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🚩 दूधीडांगर से रामकचहरी तक 13 किलोमीटर का वाकथान | 3 हजार फुट की ऊंचाई से गूंजा स्वच्छता का संदेश | गुफाएं, झरने, वन्यजीव और प्रभु श्रीराम से जुड़ी मान्यताएं बनीं आकर्षण का केंद्र

कोरबा, 17 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक आस्था से परिपूर्ण पुटका पहाड़ इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। कभी खनन गतिविधियों के कारण प्रभावित हुआ यह पहाड़ी क्षेत्र आज अपनी हरियाली, वन्यजीवों, गुफाओं, झरनों और रामकचहरी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

इसी प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को जनमानस से जोड़ने के उद्देश्य से नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा “चलो रामकचहरी – राम भांचा के द्वार” वाकथान का आयोजन किया गया। दूधीडांगर से पुटका पहाड़ स्थित रामकचहरी तक लगभग 13 किलोमीटर की पदयात्रा में प्रशासनिक अधिकारियों, नगर निगम कर्मचारियों और नागरिकों ने सहभागिता की।

हनुमान अंश मूवी के नायक शोभिनव सत्य ने लगभग 3 हजार फुट की ऊंचाई से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस आयोजन ने पुटका पहाड़ की प्राकृतिक खूबसूरती, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और धार्मिक महत्व को एक साथ सामने लाने का प्रयास किया।

🌿 खनन के दौर से प्रकृति की वापसी तक: पुटका पहाड़ की कहानी

पुटका पहाड़ की कहानी केवल इसकी ऊंचाई और सुंदर दृश्यों तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र की पहचान खनन गतिविधियों और उनसे जुड़े बदलावों से भी रही है। पूर्व में यहां बॉक्साइट खनन से संबंधित गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। खनन के कारण पहाड़ के कुछ हिस्सों और आसपास के प्राकृतिक परिवेश पर प्रभाव पड़ा तथा कुछ बस्तियों के उजड़ने की कहानी भी स्थानीय क्षेत्र से जुड़ी रही है।

समय के साथ कई प्रभावित हिस्सों में प्रकृति की हरियाली फिर दिखाई देने लगी। वनस्पतियों, पेड़-पौधों और प्राकृतिक वातावरण ने पहाड़ को नया रूप दिया। यह बदलाव पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की याद दिलाता है।

हालांकि, खनन के इतिहास, बस्तियों के विस्थापन और पर्यावरणीय बदलावों के विस्तृत तथ्यात्मक दस्तावेजों की पुष्टि आवश्यक है। पहाड़ की वास्तविक कहानी को सामने लाने के लिए स्थानीय लोगों की स्मृतियों के साथ सरकारी अभिलेखों और वन विभाग की जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी।

🛕 रामकचहरी: प्रभु श्रीराम की आस्था से जुड़ा स्थल

पुटका पहाड़ स्थित रामकचहरी इस क्षेत्र का प्रमुख आध्यात्मिक आकर्षण है। यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा सहित धार्मिक प्रतीकों के दर्शन होते हैं। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रामकचहरी का संबंध भगवान श्रीराम के वनगमन से जोड़ा जाता है।

आयोजित वाकथान के दौरान शोभिनव सत्य ने यहां स्थित हनुमान प्रतिमा पर वंदन-लेपन कर पूजा-अर्चना की तथा रामकचहरी के इतिहास और धार्मिक महत्व की जानकारी प्राप्त की।

स्थानीय परंपराओं में इस स्थल को विशेष स्थान प्राप्त है। इन मान्यताओं को सुरक्षित रखते हुए इसके इतिहास का दस्तावेजीकरण किया जाना भी आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जान सकें।

🌳 गुफाएं, झरने और वन्यजीव: प्रकृति का अनोखा संसार

पुटका पहाड़ के प्राकृतिक परिवेश में वनाच्छादित क्षेत्र, पहाड़ी रास्ते, गुफाओं और झरनों से जुड़ी स्थानीय जानकारियां आकर्षण का विषय हैं। पहाड़ के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक संरचनाएं और वनस्पतियां देखने को मिलती हैं।

यहां कुछ पेड़ों से निकलने वाले लाल रंग के पदार्थ को लेकर भी स्थानीय लोगों में विशेष चर्चा और मान्यताएं हैं। इसे सिंदूर जैसी लालिमा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, किसी पेड़ की प्रजाति और उससे निकलने वाले पदार्थ की पहचान वनस्पति विशेषज्ञों की जांच से ही प्रमाणित हो सकती है।

प्राकृतिक सौंदर्य के साथ यह क्षेत्र वन्यजीवों और जैव विविधता के संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे स्थानों पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देते समय वन्यजीवों के आवास, जंगल की शांति और प्राकृतिक संरचनाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

🚶‍♂️ दूधीडांगर से रामकचहरी तक 13 किलोमीटर का वाकथान

नगर निगम कोरबा की इस अभिनव पहल के तहत जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर दूधीडांगर से पुटका पहाड़ स्थित रामकचहरी तक वाकथान आयोजित किया गया।

आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के साथ अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, एसडीएम सरोज महिलांगे और नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों ने लगभग 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की।

महापौर संजूदेवी राजपूत और आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को प्रकृति, अध्यात्म, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ना रहा।

वनाच्छादित रास्तों से गुजरती इस यात्रा ने प्रतिभागियों को पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का अवसर दिया।

🧹 पहाड़ की ऊंचाई से स्वच्छता का संदेश

वाकथान के समापन अवसर पर शोभिनव सत्य ने पुटका पहाड़ की लगभग 3 हजार फुट की ऊंचाई से स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने नगर निगम के सफाई मित्रों और कर्मचारियों द्वारा रामकचहरी क्षेत्र में की गई साफ-सफाई की सराहना की।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन अध्यात्म, प्रकृति, पर्यावरण और स्वच्छता का अद्भुत मिश्रण है। महापौर संजूदेवी राजपूत और आयुक्त आशुतोष पाण्डेय की पहल से लोगों को प्रकृति और आध्यात्मिकता से जुड़ने का अवसर मिला है।

महापौर संजूदेवी राजपूत ने कहा कि दूधीडांगर से रामकचहरी तक की पदयात्रा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और अध्यात्म का संदेश दिया गया है।

आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने इसे केवल पैदल यात्रा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली और प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था का संगम बताया। उन्होंने रामकचहरी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन, पंचायत और वन विभाग के सहयोग से इसके इको-फ्रेंडली विकास की दिशा में काम करने की बात कही।

❤️ देहदान और नेत्रदान करने वाले परिवारों का सम्मान

कार्यक्रम में भारत विकास परिषद के तत्वावधान में देहदान करने वाले परिवारों के सदस्यों रमेश साहू, धनंजय चौहान, महेंद्र महतो और संतोष महंत को सम्मानित किया गया।

नेत्रदान करने वाले डॉ. एम.एन. उपाध्याय की पत्नी हंसा उपाध्याय का भी सम्मान किया गया। इस पहल के माध्यम से समाज में मानव सेवा और अंगदान के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

🌺 स्वच्छता दीदियों के योगदान को मिला सम्मान

महापौर संजूदेवी राजपूत ने स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वच्छता दीदियों को सम्मानित किया। इनमें प्लास्टिक संग्रहण, नियमित उपस्थिति, गीले कचरे से खाद निर्माण, घर-घर कचरा संग्रहण और कबाड़ से उपयोगी कलाकृतियां बनाने में योगदान देने वाली महिलाएं शामिल रहीं।

यह सम्मान उन कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर भी बना, जो शहर और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने में लगातार योगदान देते हैं।

🌱 पुटका पहाड़ के संरक्षण और पर्यटन की संभावनाएं

पुटका पहाड़ की प्राकृतिक और आध्यात्मिक पहचान को देखते हुए यहां जिम्मेदार पर्यटन की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। लेकिन विकास के साथ कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • पहाड़ की गुफाओं, झरनों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण।
  • रामकचहरी तक जाने वाले रास्तों की सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं का विकास।
  • स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक तथ्यों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण।
  • प्लास्टिक और अन्य कचरे पर नियंत्रण तथा नियमित सफाई व्यवस्था।
  • स्थानीय समुदाय की भागीदारी के साथ पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा।

पुटका पहाड़ की पहचान केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति, स्थानीय इतिहास और आध्यात्मिक विरासत के संगम के रूप में विकसित की जा सकती है।

🎙️ JB News Korba का निष्कर्ष

पुटका पहाड़ की कहानी हमें बताती है कि प्राकृतिक धरोहरों का महत्व केवल उनके सुंदर दृश्यों में नहीं, बल्कि उनसे जुड़े इतिहास, स्थानीय समुदाय, धार्मिक आस्था और पर्यावरण में भी छिपा होता है।

खनन से प्रभावित अतीत, प्रकृति की वापसी, रामकचहरी की आध्यात्मिक पहचान और दूधीडांगर से आयोजित 13 किलोमीटर का वाकथान—ये सभी पहलू इस क्षेत्र को विशेष बनाते हैं।

स्वच्छता का संदेश तभी सार्थक होगा, जब पहाड़, जंगल, गुफाएं, झरने और धार्मिक स्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखे जाएं।

JB News Korba | मनीष जायसवाल

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