ग्रामीणों की सात सूत्रीय मांगें बनी दीवार, हरदी बाजार की जमीन पर कब्जे की कोशिश नाकाम

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कोरबा। एसईसीएल दीपका प्रबंधन द्वारा हरदी बाजार की जमीन पर खदान विस्तार के लिए कब्जा करने की सोमवार को की गई कोशिश ग्रामीणों के कड़े विरोध के चलते नाकाम हो गई। पुलिस बल की मौजूदगी में जैसे ही एसईसीएल की टीम सर्वे शुरू करने पहुंची, ग्रामीण एकजुट होकर विरोध में खड़े हो गए और प्रबंधन को वापस लौटना पड़ा।

सात सूत्रीय मांगों पर अड़े ग्रामीण

ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सात सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक गांव की एक इंच जमीन भी दीपका प्रबंधन को नहीं दी जाएगी। उनकी प्रमुख मांगों में पुनर्वास स्थल पर नाली, पानी, बिजली, सड़क, हाट-बाजार, खेल मैदान और सरकारी कार्यालय की व्यवस्था, प्रत्येक प्रभावित परिवार को नौकरी, सभी जमीन मालिकों को 100 प्रतिशत मुआवजा, मकान और परिसंपत्तियों के साथ-साथ पट्टे का प्रावधान, मकान तोड़ने से पहले एकमुश्त मुआवजा, पेसा एक्ट के तहत ग्रामसभा की सहमति और मकान तोड़े जाने वाले परिवारों को उसी दिन मुआवजा राशि देने सहित स्थानीय बेरोजगारों को नौकरी शामिल है।

नेताओं ने जताया समर्थन

विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर, भाजपा जिला मंत्री अजय दुबे, नरेश टंडन, विजय जायसवाल और सरपंच लोकेश्वर कंवर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि पाली एसडीएम की मौजूदगी में हुए समझौते पर भी अमल नहीं किया गया है, ऐसे में खदान प्रबंधन की मनमानी और दादागिरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए

ग्रामीणों के कड़े रुख और व्यापक जनसमर्थन से खदान प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए हैं। विरोध के चलते खदान अधिकारियों को पुलिस की मौजूदगी के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक खदान प्रबंधन जमीन पर कब्जा नहीं कर पाएगा।

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