कोरबा। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नहीं, बल्कि चुनावी लाभ लेने के लिए लाया गया एक ‘राजनीतिक ड्रामा’ है।
मुख्य बिंदु: क्यों बताया इसे ‘भ्रामक’?
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के विरोध में नहीं है, बल्कि इसके अधूरे और भ्रामक स्वरूप के खिलाफ है। उन्होंने इस विधेयक की खामियों पर निम्नलिखित सवाल उठाए:
- ओबीसी वर्ग की अनदेखी: बिल में ओबीसी एवं वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इससे सामाजिक रूप से पिछड़ी महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा।
- परिसीमन का पेंच: जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की शर्त जोड़ने के कारण यह कानून तुरंत लागू नहीं होगा। सरकार ने कोई ठोस समयसीमा नहीं दी है, जिससे इसके वर्षों तक लटकने की आशंका है।
- चुनावी स्टंट: उन्होंने कहा कि दो राज्यों के आगामी चुनावों में लाभ लेने के लिए इसे जल्दबाजी में लाया गया है, ताकि पार्टी की छवि सुधारी जा सके।
“यह समझ से परे है कि 2023 में पारित कानून को 2024 से लागू करने में क्या बाधा थी? इसे परिसीमन से जोड़कर टालना संकेत देता है कि सरकार की प्राथमिकता क्रियान्वयन नहीं, बल्कि वोट बैंक है।” – जयसिंह अग्रवाल, पूर्व मंत्री
सामाजिक न्याय की मांग
जयसिंह अग्रवाल ने मांग की कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए ओबीसी और वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए ‘कोटा के भीतर कोटा’ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि कानून प्रभावी रूप से लागू नहीं होता, तो जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कम हो जाएगा।
प्रेस वार्ता में उपस्थिति
इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष (शहर) मुकेश राठौर, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, विकास सिंह, सपना चौहान, कुसुम द्विवेदी, नारायण कुर्रे, और संतोष राठौर सहित कई कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।















