कोरबा: छत्तीसगढ़ अपने वन संसाधनों और उसकी अदभुत सुंदरता के लिए जाना जाता है. यहां बड़े पैमाने पर कीमती और इमारती लकड़ियों के जंगल मौजूद हैं. ऊर्जाधानी के रूप में जाने जाने वाले कोरबा से लगे हसदेव के जंगल हैं, जिसे मध्य भारत का फेफड़ा भी कहा जाता है. पेड़ों की वजह से यहां का पर्यावरण संतुलन काफी हद तक बाकी जगहों से अच्छा है. लेकिन लगातार हो रही पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संतुलन तेजी से बिगड़ भी रहा है. हसदेव के जंगलों में पेड़ों की कटाई का मुद्दा अभी थमा भी नहीं था कि सीएसईबी कॉलोनी में कटे हुए साल के पेड़ों के गायब होने का मुद्दा गर्मा गया है.

साल पेड़ों की कटाई और उसके गायब होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. ऐसे ही एक मामले में रेंज ऑफिसर द्वारा पेड़ कटाई का काम एक ऐसे व्यक्ति को सौंपे जाने की चर्चा है, जिसका नाम पहले भी साल प्रजाति की कीमती लकड़ी तस्करी के मामलों में सामने आ चुका है. इसके चलते विभाग को न केवल बेशकीमती लकड़ियों की चोरी झेलनी पड़ी, बल्कि पेड़ कटाई के सामने आने से महकमे में भी हड़कंप मच गया है.
वन विभाग की बड़ी लापरवाही
सीएसईबी के आवासीय कॉलोनी में सूख चुके पेड़ों को काटने की प्रक्रिया चल रही थी. वन विभाग द्वारा इन पेड़ों को काटकर लकड़ी सरकारी डिपो में जमा करना था. इसी दौरान सुनील गुप्ता नामक व्यक्ति ने लकड़ी काटकर अन्यत्र स्थान पर बेच दिया है. जिसकी कीमत लाखों में है, लकड़ी तस्कर को पकड़ गया।

सीएसईबी कॉलोनी में काटे जा रहे थे सूखे पेड़
दरअसल, शहर के बीचो-बीच स्थित छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल(सीएसईबी) के आवासीय परिसर में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित थी. आवासीय कॉलोनी में कुछ पेड़ सूख गए थे. जो लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं. कुछ पेड़ ऐसे भी है जो साल बोरर के प्रकोप में आकर पूरी तरह से बंजर हो गए हैं, या काटने योग्य हैं, इन पेड़ों की कटाई की कागजी प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी. वन विभाग की ओर से 204 ऐसे पेड़ों को काटने के लिए चिन्हांकित किया गया था, चूंकि यह सभी वन क्षेत्र में न होकर शहर के राजस्व क्षेत्र में हैं. इसलिए वन विभाग ने इन पेड़ों की कटाई का खर्चा भी एसडीएम कार्यालय में जमा कर दिया था.
वन विभाग के अनुसार सुनील गुप्ता ने अनधिकृत तरीके से पेड़ों को कटवा कर इसकी तस्करी कर ली है. जबकि बिना वन विभाग की अनुमति या मिलीभगत के इस तरह से शहर के बीचो-बीच से लकड़ी गायब करना बेहद कठिन काम है. विभाग ने जांच की बात कही है, यह भी कहा है कि विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की इस तस्करी में संलिप्तता पाए जाने पर, नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
सुनील गुप्ता का पूर्व में भी इस तरह का रिकॉर्ड रहा है. कई मामलों में उसकी जांच चल रही है, जो प्रक्रियाधीन है. फिलहाल हमारा पूरा फोकस लकड़ी को रिकवर करने को लेकर है. इस मामले में विभागीय संलिप्तता पाए जाने पर भी कार्रवाई की जाएगी. जांच की आदेश दिए गए हैं. लकड़ी तस्कर के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज करवाया गया है:
विभाग की नाक के नीचे से तस्करी
सीएसईबी कॉलोनी परिसर में कटाई के दौरान सुनील गुप्ता ने मिलीभगत कर 2 ट्रक लकड़ी गायब कर दी है. जानकारी के अनुसार लकड़ी को कहीं और भेज दिया गया है. हैरत की बात यह है कि घटना स्थल रेंजर कार्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित है. जब 14 जुलाई की शाम कार्यालय अभियंता ने लकड़ियों को ट्रकों में लोड होते देखा, तब जाकर मामले का खुलासा हुआ.
पुलिस ने दर्ज किया मामला
तस्करी की खबर सामने आते ही वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर रेंजर विक्रांत सिंह कंवर ने सुनील गुप्ता के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने इस मामले में बीएनएस की धारा 303(2) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है. इससे पहले मानिकपुर खदान क्षेत्र में नीलगिरी के पेड़ों की कटाई और जांजगीर-चांपा में पकड़े गए लकड़ी लदे वाहनों के मामले में भी सुनील नाम जुड़ा था. सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जांजगीर-चांपा में पकड़े गए दस्तावेज (टीपी) पर कोरबा वन मंडल के किसी अधिकारी का कथित हस्ताक्षर होने का दावा किया गया था. जिसकी जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी है. इस पूरे मामले में वन विभाग की भूमिका पर भी लोग सवाल खड़े कर रहे हैं.















