बंजारी वाले बाबा” का 44वां उर्स पाक 15 अक्टूबर से, तैयारियां जोरों पर, जानें उनके बारे में, राजधानी के इतिहास में उनका महत्वपूर्ण स्थान।

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रायपुर : रायपुर स्थित मुस्लिम संत सैयद शेर अली आगा की दरगाह, जो ‘बंजारी वाले बाबा की दरगाह’ के नाम से प्रसिद्ध है, उन्होंने सभी धर्मों के लोगों को आकर्षित किया है। सभी धर्मों के लोग पवित्र संत का आशीर्वाद लेने के लिए इस दरगाह पर आते हैं। हिंदू इसे मंदिर मानते हैं और मुसलमान इसे अल्लाह का निवास मानते है। परंपरा के अनुसार, हिंदू संत के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को दर्शाते हुए इस दरगाह पर नारियल चढ़ाते हैं। ऐसा माना जाता है कि संत सैयद शेर अली आगा 1965 में अफगानिस्तान से आए थे। इसके बाद, वे रायपुर में बंजारी माता के मंदिर के पास रहने लगे थे, वे वहां सिर्फ एक कम्बल में ही निवास करते थे, दिनभर लोग उनके दर्शनों के लिये खड़े रहते थे, जहाँ वे अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हो गए

धीरे-धीरे, लोग, अपनी जाति और समुदाय की परवाह किए बिना, संत का आशीर्वाद लेने के लिए उनके निवास पर आने लगे थे। 1982 में संत के निधन के बाद, लोगों ने उनके नाम पर एक दरगाह का निर्माण कराया था। इस प्रकार यह दरगाह धार्मिक एकता का एक उदाहरण बन गई है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग अपनी मनोकामनाएँ पूरी करने के लिए अपने मतभेदों को भुला देते हैं। उस समय इस दरगाह का नाम बंजारी वाले बाबा के नाम पर पड़ा था, बाद में इसका नाम बदलकर सैयद शेर अली आगा कर दिया। आज भी इस दरगाह पर हिन्दू बड़े ही आदर से सर झुकाते है और पुराने बुजुर्ग उक्त संत की महिमा बताते है।

इसके साथ ही प्रतिवर्ष मुस्लिम समुदाय उनका उर्स मनाता है। सरकारे छत्तीसगढ़ हज़रत सैय्यद शेर अली आगा र.अ. (बंजारी वाले बाबा) का 44वां सालाना उर्स 15 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। सज्जादा नशीन मो. ईशराक रिज़वी अशरफी ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी हज़रत बाबा सैय्यद शेर अली आगा का 7 दिवसीय 44वां सालाना उर्स पाक आगामी 15 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2025 तक बड़े ही अकीदत और शान-ओ-शौकत के साथ मनाया जायेगा। ट्रस्ट से जुड़े सभी मेंबर तमाम उर्स की तैयारियां तेजी से कर रहे हैं। जो प्रतिवर्ष मनाया जाता है।

मो. ईशराक रिज़वी अशरफी ने जानकारी दी कि सालाना उर्स का आगाज़ 15 अक्टूबर को नमाज-ए-असर के बाद होगा। शाही संदल और चादर शरीफ का जुलूस सज्जादा नशीन हज़रत मो. नईम रिज़वी अशरफी बांसटाल रायपुर से निकालेंगे, जो आस्ताने आलिया पहुंचेगा, जहां परचमकुशाई व चादरपोशी की रस्म अदा की जाएगी और महफिल-ए-सीमा आली जनाब इंटरनेशनल कव्वाल सदाक़त शबरी राजस्थान रोड शो में अपना कलाम पेश करेंगे।

7 दिवसीय उर्स के कार्यक्रम इस प्रकार रहेंगे :

16 अक्टूबर : ऑल इंडिया नातिया मुशायरा रात 9 बजे।
17 अक्टूबर : रात 9 बजे से तकरीर – ख़तीब-ए-ख़ुसूसी हजरत अल्लामा मौलाना मो. सैय्यद अमीनुल कादरी साहब किब्ला, अमीर सुन्नी दावत-ए-इस्लामी मुंबई महाराष्ट्र व हजरत मौलाना मो. इसरार अशरफी रिज़वी जामई साहब किब्ला रायपुर।
18 अक्टूबर : रात 9 बजे शहंशाह-ए-खिताबत हजरत सैय्यद मो. महमूद अशरफ साहब किब्ला अशरफी उल जिलानी सज्जादा नशीन किछौछा शरीफ (यूपी), हज़रत सैय्यद आलमगीर मियां साहब किछौछा शरीफ (यूपी) ख़िताब करेंगे।
19 अक्टूबर : छब्बीसवीं शरीफ, बड़ा कुल शरीफ सुबह 7 बजकर 35 मिनट में फातिहा कुल शरीफ अदा की जाएगी, बाद में तक़सीम-ए-तबर्रुक किया जाएगा।
19 अक्टूबर : बाद नमाज-ए-मगरिब हज़रत सैय्यद शेर अली आगा र.अ. के तबर्रुकात की ज़ियारत कराई जाएगी।
20 अक्टूबर : रात 9 बजे संजरी नातिया ग्रुप रायपुर अपना कलाम पेश करेगा।
21 अक्टूबर : बाद नमाज-ए-मगरिब छोटा कुल शरीफ की फातिहाख़ानी व रात 9 बजे मशहूर कव्वाल रईस अनीस साबरी अपना कलाम पेश करेंगे।

जायरीन के लिए इंतजाम :

शमा महफिल पूरे उर्स के दौरान 7 दिन सुबह व शाम जायरीनों के लिए आम लंगर का इंतजाम होगा। देश के विभिन्न स्थानों से आए जायरीनों के लिए माक़ूल लाइट, पानी व भोजन की व्यवस्था हर साल की तरह दरगाह ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध होगी, जिसमें प्रशासन का भी सहयोग रहेगा। हज़रत सैय्यद शेर अली आगा र.अ. बंजारी वाले बाबा का उर्स हर धर्म-संप्रदाय के लोग बड़ी आस्था और शान-ओ-शौकत के साथ पूरे 7 दिन तक मेले के रूप में मनाते हैं और अपनी-अपनी मन्नतें व फ़रियाद लेकर पहुंचते हैं, जिसकी वजह से लाखों की भीड़ हर साल मेले में होती है। संत का राजधानी के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है।

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