कोरबा। आज देश में सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अधिकारों तथा उनके बच्चों के भविष्य को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार चर्चा होती है। यह आवश्यक भी है। लेकिन एक सवाल आज भी अपनी जगह खड़ा है—क्या देश में कोई ऐसा नेता है जो सवर्ण समाज के अधिकारों, उनकी समस्याओं और उनके बच्चों के भविष्य की भी उतनी ही गंभीरता से बात करे?
यह सवाल किसी अन्य समाज के अधिकारों का विरोध नहीं है, बल्कि समानता और न्याय के सिद्धांत पर सवर्ण समाज की समस्याओं को भी राजनीतिक विमर्श में उचित स्थान देने की मांग है।
आज सामान्य वर्ग के ऐसे अनेक परिवार हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उनके बच्चे भी महंगी शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार की कमी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार का दर्द उसकी जाति देखकर कम या अधिक नहीं होता।
धनेश कुमार सिंह, अधिवक्ता ने कहा कि देश के राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को यह बताना चाहिए कि सवर्ण समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, उनके युवाओं और बच्चों के भविष्य के लिए उनकी स्पष्ट नीति क्या है?
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के अधिकारों को कम करना समाधान नहीं है। समाधान यह है कि देश में ऐसा न्यायपूर्ण व्यवस्था विकसित हो, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को उसकी वास्तविक स्थिति के आधार पर शिक्षा, रोजगार और विकास के पर्याप्त अवसर मिल सकें।
आज आवश्यकता इस बात की है कि कोई राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि खुलकर यह कहे कि—
- आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के बच्चों की शिक्षा और भविष्य की चिंता भी सरकार की जिम्मेदारी है।
- प्रतिभावान विद्यार्थियों को अवसर उनकी आर्थिक स्थिति और योग्यता के आधार पर भी मिलना चाहिए।
- सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों के लिए प्रभावी शैक्षणिक एवं रोजगार सहायता योजनाएं बनाई जाएं।
- प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को वास्तविक सहायता मिले।
- किसी भी वर्ग के गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति के साथ भेदभाव न हो।
- सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय को भी समान महत्व दिया जाए।
धनेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत किसी एक जाति या वर्ग का नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय का देश है। इसलिए राजनीति ऐसी होनी चाहिए जो समाज को बांटने के बजाय सभी वर्गों के गरीब, प्रतिभावान और जरूरतमंद लोगों को आगे बढ़ने का अवसर दे।
उन्होंने राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से सवाल किया—
“क्या देश में कोई ऐसा नेता है जो सवर्ण समाज के अधिकारों की बात करेगा, उनके गरीब परिवारों की आवाज उठाएगा और उनके बच्चों के सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य की स्पष्ट गारंटी की बात करेगा?”

















