कोरबा। Korba Panchayat Secretary Transfer Controversy जिला पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। ग्राम पंचायत सचिवों की पदस्थापना को लेकर जारी दो आदेशों ने प्रशासनिक पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
8 जून 2026 को जिला पंचायत सीईओ द्वारा जारी आदेश में जिन सचिवों की जिम्मेदारियां तय की गई थीं, उसी आदेश को महज सात दिन बाद 15 जून को संशोधित कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जिनमें से एक सचिव को शिकायतों के चलते पंचायत से हटाकर जनपद पंचायत में संबद्ध किया गया था, उसे बाद में दूसरी पंचायत का प्रभार सौंप दिया गया।

क्या जिला पंचायत सीईओ का पहला आदेश गलत था?
यदि 8 जून को जारी आदेश प्रशासनिक दृष्टि से उचित था तो फिर उसे बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? और यदि पहला आदेश गलत था तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा? इन सवालों का जवाब अब तक सामने नहीं आया है।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के इतने कम समय में आदेश बदलना सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जाता। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर कौन से नए तथ्य सामने आए जिनके आधार पर पूरी पदस्थापना सूची बदल दी गई।
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं, नई जिम्मेदारी
जिन सचिवों के खिलाफ भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें लंबित बताई जा रही हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की बजाय नई पंचायतों में पदस्थापना किए जाने से भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतें गंभीर थीं तो जांच पूरी होने तक संबंधित सचिवों को जिम्मेदारी से अलग रखा जाना चाहिए था। वहीं यदि शिकायतें निराधार थीं तो फिर उन्हें पहले हटाया ही क्यों गया?
सीईओ की कार्यप्रणाली पर बढ़ी चर्चा
लगातार बदलते आदेशों ने जिला पंचायत सीईओ की निर्णय क्षमता और प्रशासनिक स्थिरता को लेकर भी बहस छेड़ दी है। पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि ऐसे फैसलों से न केवल कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनती है बल्कि प्रशासन की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
अब जवाब का इंतजार
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सात दिन के भीतर ऐसा क्या हुआ कि जिला पंचायत सीईओ को अपना ही आदेश बदलना पड़ा? क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या फिर किसी प्रभाव और दबाव का परिणाम?जब तक इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तब तक पंचायत विभाग और जिला पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल थमने वाले नहीं हैं।















