छत्तीसगढ़ महिला आयोग अध्यक्ष का चयन…! पूर्व मंत्री से पूर्व अध्यक्ष तक…कौन बनेगा नया चेहरा…? रेस में है कई दिग्गज

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रायपुर, 22 जून। State Women Commission : राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकार के सामने केवल एक चेहरा चुनने की चुनौती नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन, संगठन में सक्रियता और महिला नेतृत्व को उचित प्रतिनिधित्व देने की कसौटी भी है। ऐसे में पूर्व अध्यक्ष, पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक समेत कई प्रभावशाली महिला नेताओं के नाम सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। वर्तमान अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक का कार्यकाल आगामी 12 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही, प्रदेश के राजनीतिक और संगठनात्मक गलियारों में नई अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर मंथन शुरू हो चुका है। इसे लेकर भाजपा संगठन के भीतर चार प्रमुख नाम मजबूती से उभरकर सामने आए हैं।

रेस में शामिल 4 प्रमुख दावेदार और उनकी ताकत

ममता साहू (पूर्व सदस्य, राज्य महिला आयोग): महिला आयोग की पूर्व सदस्य रह चुकीं ममता साहू को प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कानूनी पेचीदगियों की गहरी समझ है। महिला उत्पीड़न और अधिकारों से जुड़े मामलों में उनका जमीनी अनुभव उन्हें इस पद का सबसे मजबूत दावेदार बनाता है। विभा अवस्थी (प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा महिला मोर्चा): संगठन में लंबी सक्रियता और महिला कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ इनकी सबसे बड़ी ताकत है। पार्टी के प्रति समर्पण और व्यापक सांगठनिक क्षमता के कारण विभा अवस्थी का नाम प्रबल दावेदारों की सूची में है। विभा राव (पूर्व अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग): महिला मुद्दों पर काम करने का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड और बतौर अध्यक्ष पूर्व कार्यकाल का अनुभव इनके पक्ष में है। यदि सरकार किसी परखे हुए और अनुभवी चेहरे को प्राथमिकता देती है, तो विभा राव एक स्वाभाविक विकल्प हैं। गीतिका सौर्य (वर्तमान सदस्य, राज्य महिला आयोग): आयोग के भीतर वर्तमान सक्रियता और मौजूदा कार्यप्रणाली की अंदरूनी समझ के कारण गीतिका सौर्य का नाम भी चर्चा में है। जमीनी स्तर पर महिलाओं से जुड़े मामलों में उनकी निरंतर भागीदारी उन्हें इस दौड़ में बनाए हुए है।

इसके अलावा इन नामों पर भी हो रही है चर्चा

इसके अलावा भाजपा महिला मोर्चा की वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रदेश स्तर पर सक्रिय महिला नेताओं के नामों पर भी मंथन चल रहा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा संगठन अनुभव, सांगठनिक सक्रियता, क्षेत्रीय संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए किसी मजबूत महिला चेहरे पर दांव लगा सकता है।सबसे चर्चित नामों में महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री हर्षिता पांडेय का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। बिलासपुर संभाग से आने के कारण क्षेत्रीय समीकरण भी उनके पक्ष में माने जा रहे हैं।इसमें धमतरी की पूर्व विधायक और भाजपा की मुखर महिला नेताओं में शुमार रंजना डिपेंड साहू का नाम भी चर्चा में है। महिलाओं, युवाओं और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका तथा संगठन में उनकी स्वीकार्यता उन्हें संभावित दावेदारों की सूची में शामिल करती है।पूर्व मंत्री रमशीला साहू, जिन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, उनका प्रशासनिक अनुभव और महिला समूहों के बीच प्रभाव भी उन्हें इस पद की दौड़ में महत्वपूर्ण बनाता है। दुर्ग संभाग में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को भी संगठन नजरअंदाज नहीं करना चाहता।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनावी रणनीति के तहत महिला मतदाताओं तक मजबूत संदेश देने वाले चेहरे को प्राथमिकता दे सकती है। हालांकि अभी तक सरकार या संगठन की ओर से किसी नाम पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन महिला आयोग के अध्यक्ष पद को लेकर सियासी अटकलें लगातार तेज हो रही हैं। आने वाले दिनों में इस नियुक्ति को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

क्या होगा चयन का आधार?

फिलहाल राज्य सरकार या भाजपा संगठन की ओर से किसी भी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, महिला आयोग जैसे संवेदनशील संस्थान के लिए सरकार सिर्फ राजनीतिक वफादारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और महिला हितों के प्रति जमीनी सक्रियता को चयन का मुख्य आधार बनाएगी।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं। 12 जुलाई को डॉ. किरणमयी नायक की विदाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छत्तीसगढ़ की आधी आबादी को न्याय दिलाने वाली इस सर्वोच्च कुर्सी की जिम्मेदारी किस महिला नेत्री के कंधों पर आती है।

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