हरेली महोत्सव में बिखरी छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की मनमोहक छटा, लोकगीत-नृत्य और पारंपरिक खेलों ने बांधा समां,देखिए विडिओ

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कोरबा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा, कृषि संस्कृति और छत्तीसगढ़ी अस्मिता के प्रतीक लोकपर्व हरेली का भव्य आयोजन बुधवार, 12 अगस्त को हसदेव नदी तट स्थित भवानी मंदिर के समीप छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर परिसर में किया गया। छत्तीसगढ़ महतारी संस्कृति संवर्धन सेवा समिति, कोरबा के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत मुख्य अतिथि तथा पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए।

अतिथियों के पहुंचते ही ढोल-नगाड़ों, पुष्पहारों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आत्मीय स्वागत किया गया। इसके बाद लोक कलाकारों ने छत्तीसगढ़ का राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार…’ प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया।

लोकनृत्य, गेड़ी दौड़ और पारंपरिक खेलों ने जीता दिल

हरेली महोत्सव के दौरान परिसर में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिली। लोकगीत, लोकनृत्य, गेड़ी दौड़, नरियर फेंक, फुगड़ी सहित अनेक पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का खूब मनोरंजन किया। सुप्रसिद्ध लोकमंच कलाकार थिरमनदास एवं उनकी मंडली की रंगारंग प्रस्तुतियों पर दर्शक जमकर झूमे और तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

हरेली माटी, किसान और लोकजीवन की आत्मा : डॉ. महंत

मुख्य अतिथि डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली केवल कृषि उपकरणों की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की माटी, किसान, प्रकृति, पशुधन और लोकजीवन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज की जरूरत है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों, बोली और लोकपरंपराओं से जुड़ी रहे। ऐसे पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करते हैं।

डॉ. महंत ने आयोजन की सराहना करते हुए समिति के पदाधिकारियों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।

हमारी पहचान और अस्मिता का गौरव है हरेली : जयसिंह अग्रवाल

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्वों में से एक है। इसमें कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक एकजुटता की भावना साफ दिखाई देती है। किसान और कृषि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ यहां की लोकसंस्कृति की भी आधारशिला हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर, कोरबा में सांस्कृतिक चेतना और छत्तीसगढ़ी अस्मिता के प्रतीक के रूप में विकसित हो रहा है। ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी अपनी माटी, बोली, परंपरा और संस्कृति से जुड़ती है।

22 वर्षों से जारी है हरेली महोत्सव

समिति के प्रदेश अध्यक्ष मोहन सिंह प्रधान ने बताया कि कोरबा में पिछले 22 वर्षों से हरेली महोत्सव का निरंतर आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने आयोजन में जयसिंह अग्रवाल के सहयोग और छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर के निर्माण एवं विभिन्न आयोजनों में उनके योगदान का उल्लेख किया।

समिति के महासचिव प्यारे लाल चौधरी ने आयोजन की सफलता के लिए अतिथियों, कलाकारों, सामाजिक संगठनों, नागरिकों और उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य केवल पर्व मनाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।

बड़ी संख्या में उमड़ा जनसैलाब

कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत, पारंपरिक खेल और लोकनृत्य आकर्षण का केंद्र बने रहे।

छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर परिसर में आयोजित यह भव्य हरेली महोत्सव छत्तीसगढ़ की माटी, किसान और लोकसंस्कृति के प्रति लोगों की गहरी आस्था का जीवंत प्रमाण बना। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आधुनिकता के दौर में भी छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराएं और सांस्कृतिक विरासत लोगों के दिलों में मजबूती से जीवित हैं।

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